विमान हादसे: जब आसमान से टूटीं देश की बड़ी उम्मीदें
भारत में विमान व हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं में कई प्रमुख हस्तियों की दर्दनाक मौतें
भारत ही नहीं, दुनिया भर में विमान और हेलीकॉप्टर हादसे कई बार ऐसी राष्ट्रीय क्षति का कारण बने हैं, जिनकी भरपाई संभव नहीं हो सकी। इन हादसों में देश ने कई बड़े नेताओं, वैज्ञानिकों और सैन्य अधिकारियों को खोया है। ऐसे हादसे न सिर्फ तकनीकी सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पूरे देश को शोक में डुबो देते हैं।
भारत में विमान दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाली प्रमुख हस्तियों में सबसे पहले नाम आता है संजय गांधी का। 23 जून 1980 को दिल्ली में एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा तत्कालीन भारतीय राजनीति के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
इसके बाद माधवराव सिंधिया, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री थे, 30 सितंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के पास एक विमान हादसे में चल बसे। यह दुर्घटना भी बेहद दुखद रही।
लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी का निधन 3 मार्च 2002 को आंध्र प्रदेश में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुआ। उनका असामयिक जाना संसदीय लोकतंत्र के लिए बड़ी क्षति माना गया।
देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और अन्य सैन्य अधिकारियों की मृत्यु 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में हुई। इस दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
वहीं, भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा का निधन 24 जनवरी 1966 को स्विट्ज़रलैंड के मोंट ब्लांक क्षेत्र में हुए विमान हादसे में हुआ था, जिसे आज भी रहस्यमय माना जाता है।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर विजय रूपाणी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसों की अफवाहें फैलीं, लेकिन यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि दोनों नेता सुरक्षित हैं और उनका निधन नहीं हुआ है। ऐसी अपुष्ट खबरें समाज में भ्रम फैलाती हैं।
विमान हादसों का इतिहास हमें तकनीकी सतर्कता, सुरक्षा मानकों और जिम्मेदार सूचना प्रसार की अहमियत सिखाता है।
