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Breking news suprim kort ne sunaye do ahem faisle : सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत सुप्रीम कोर्ट ने सुनाए दो अहम फैसले

suprim kort ne sunaye do ahem faisle : सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत सुप्रीम कोर्ट ने सुनाए दो अहम फैसले

देश में अक्सर देखा जाता है कि लोग रोजगार के लिए इधर से उधर भटकते रहते हैं और बेरोजगारी को दूर करने के लिए रोजगार को लेकर तरह-तरह के हथकंडे आजमाते रहते हैं जिस पर सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो अहम फैसला सुनाया है अब प्राइवेट सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करने का अधिकार नौकरी देने वाले को नहीं रहेगा सुप्रीम कोर्ट ने दो बड़े अहम फैसला सुना दिए हैं कर्मचारियों के लिए जहां अब उन्हें काम देने वाले व्यक्ति उन्हें बर्खास्त नहीं कर सकता काम देने वाला व्यक्ति काम से बाहर नहीं कर सकता सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दो अहम फैसला सुना दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में कोई सूचना छुपाना भ्रामक जानकारी और मुकदमा दर्ज की जानकारी देने का मतलब यह नहीं है की नौकरी देने वाला अपने मनमानी तरीके से किसी को बर्खास्त कर दे अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया है कि अगर किसी मामले में कोई व्यक्ति नौकरी कर रहा है और कोई जानकारी छुपाता है तो उसे नौकरी देने वाला व्यक्ति से बर्खास्त नहीं कर सकता सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि कर्मचारियों को अधिक भुगतान या इंक्रीमेंट गलती से किया गया तो उसके रिटायरमेंट के बाद उससे वसूली इस आधार पर नहीं की जा सकती कि ऐसा किसी गलती कारण हुआ है क्योंकि वह उन पैसों से अपने परिवार का पालन पोषण करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित की ओर से एक याद का दायर की गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि पीड़ित रेलवे सुरक्षा बल के कांस्टेबल के पद के लिए सिलेक्ट हुआ था और जब पीड़ित की ट्रेनिंग शुरू हुई थी इस दौरान पता चला कि पीड़ित व्यक्ति ने कुछ जानकारी छुपा कर रखी थी उसके खिलाफ अपराध FIR दर्ज था मगर उसने मुकदमे की बात को छुपा कर रखा जिस पर सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि जिस व्यक्ति की यह जानकारी छुपाया है या गलत घोषणा की है उसे सेवा से बनाए रखने की माफ करना कोई अधिकार नहीं है मगर उसके साथ मनमानी ढंग से किसी प्रकार का व्यवहार करना भी गलत है नौकरी देने वाले को उसे बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।

केरल में एक शिक्षक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हैं कहा कि शिक्षक ने साल 1973 में स्टडी लीव ली लेकिन उन्हें एग्रीमेंट देते समय अवकाश की अवधि पर विचार नहीं किया गया और 24 साल बाद 1997 में नोटिस जारी किया गया 1999 में उन्हें रिटायर्ड होने के बाद उनके खिलाफ वसूली की कार्रवाई विभाग द्वारा की गई थी जिस पर केरल हाईकोर्ट ने उन्हें राहत नहीं दी तो शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाया जहां सुप्रीम कोर्ट ने पहले के फैसले का जिक्र करती है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई सरकारी कर्मचारियों विशेष रूप से जो सेवा पर है जो भी राज्य प्राप्त करते हैं उसे अपने परिवार के भरण पोषण के लिए खर्च करेगा।

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