सीधी मे आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के बदले ₹1 लाख रिश्वत मांगने का आरोप, प्रभारी परियोजना अधिकारी निलंबित

सीधी मे आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के बदले ₹1 लाख रिश्वत मांगने का आरोप, प्रभारी परियोजना अधिकारी निलंबित

एमपी के सीधी जिले की आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के एवज में एक लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में महिला एवं बाल विकास विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जहा सीधी जिले की जनपद मझौली की बाल विकास परियोजना में पदस्थ पर्यवेक्षक एवं प्रभारी परियोजना अधिकारी ज्योति विश्वकर्मा को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर (महिला एवं बाल विकास), जिला सीधी द्वारा जारी आदेश के तहत की गई है।

इस जारी मे यह बताया गया है कि ग्राम पांड क्रमांक- 1 स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में सहायिका के पद के लिए किरण बैगा ने एमपी ऑनलाइन चयन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया था। जहा नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान आवेदिका ने आरोप लगाया कि ज्योति विश्वकर्मा के द्वारा नियुक्ति कराने के बदले व्यक्तिगत रूप से तथा फोन के माध्यम से एक लाख रुपये रिश्वत की मांग लगातार की जा रही थी।

जहा यह पूरा मामला शासन स्तर तक पहुंचने के बाद प्रभारी मंत्री व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग दिलीप जायसवाल के पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई के सीधी कलेक्टर को निर्देश प्राप्त हुए। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच की गई।

इस आदेश में यह बताया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया में जानबूझकर एक माह से अधिक समय तक विलंब किया गया। इसी दौरान रिश्वत की मांग किए जाने से संबंधित तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग प्रमाण भी पाए गए। जहा आदेश में कहा गया है कि प्रभारी परियोजना अधिकारी का यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 1, 2 एवं 3 के विपरीत है और इसे कदाचरण की श्रेणी में माना जाता है।

जहा इसके आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम-9 के तहत ज्योति विश्वकर्मा को 31 अगस्त 2026 से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

अब उनके निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना रामपुर नैकिन क्रमांक-01, जिला सीधी निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता भी होगी।

 

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