100 वर्ग किमी सर्च के बाद सुरक्षित मिली कॉलर वाली बाघिन
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले कई दिनों से वन विभाग की चिंता का कारण बनी कॉलर लगी मादा बाघिन आखिरकार सुरक्षित मिल गई। 1 जुलाई की दोपहर के बाद से उसका जीपीएस और वीएचएफ रेडियो कॉलर सिग्नल देना बंद कर चुका था, जिससे उसके सुरक्षित होने को लेकर आशंकाएं बढ़ गई थीं। करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लगातार चलाए गए विशेष खोज अभियान के बाद रविवार को हाथियों की मदद से बाघिन को उसके होम रेंज में सुरक्षित खोज लिया गया।
सिग्नल बंद होते ही शुरू हुई तलाश
1 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे के बाद कॉलर से कोई लोकेशन नहीं मिलने पर वन विभाग ने तत्काल खोज अभियान शुरू कर दिया। वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में सुरक्षा श्रमिकों और बीट गार्डों की टीम जंगल में उतरी, लेकिन पहले दिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद खोज अभियान का दायरा बढ़ाते हुए तीन अलग-अलग टीमें बनाई गईं, जिन्होंने लगातार कई दिनों तक संभावित क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चलाया।
बारिश बनी सबसे बड़ी चुनौती
लगातार हो रही बारिश ने अभियान को बेहद कठिन बना दिया। जंगल में पदचिन्ह बार-बार मिट जाते थे और कई स्थानों तक पहुंचना जोखिम भरा था। इसके बावजूद वन अमले ने अभियान जारी रखा और ग्रामीणों से मिलने वाली हर सूचना का भी परीक्षण किया।

विशेष टीम, हाथी और डॉग स्क्वाड की ली गई मदद
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेष खोज दल का गठन किया गया। इसमें बांधवगढ़ के वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूसीटी) के डॉ. प्रशांत देशमुख को शामिल किया गया। दो प्रशिक्षित हाथियों, महावतों, डॉग स्क्वाड और अतिरिक्त वीएचएफ रिसीवर एंटीना की सहायता ली गई। संभावित स्थानों पर ट्रैप कैमरे भी लगाए गए, लेकिन बाघिन कैमरों में कैद नहीं हो सकी।
पदचिन्ह बने सबसे अहम सुराग
लगातार प्रयासों के बाद खोजी दल को बाघिन के ताजा पदचिन्ह मिले। इसके बाद हाथियों की मदद से इलाके की घेराबंदी कर सर्च किया गया और रविवार को कॉलर वाली मादा बाघिन अपने होम रेंज में सुरक्षित दिखाई दी। वन विभाग ने उसके फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड किए। जांच में सामने आया कि बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन उसका रेडियो कॉलर पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है।

क्षेत्रीय संचालक ने दी जानकारी
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि बाघिन की पिछले लगभग दस महीनों से सघन मॉनिटरिंग की जा रही थी। रेडियो कॉलर के बंद हो जाने के कारण उसकी लोकेशन मिलना बंद हो गई थी। अब बाघिन की आगे की मॉनिटरिंग और आवश्यक कार्रवाई के लिए भोपाल मुख्यालय से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाघिन पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है, जिससे वन विभाग ने राहत की सांस ली है।


