छिंदवाड़ा में बदला सियासी समीकरण! कमलनाथ के गढ़ में अब जीतू पटवारी की नई रणनीति

छिंदवाड़ा में बदला सियासी समीकरण! कमलनाथ के गढ़ में अब जीतू पटवारी की नई रणनीति

छिंदवाड़ा: कभी कांग्रेस के सबसे मजबूत किलों में गिने जाने वाला छिंदवाड़ा अब मध्य प्रदेश की राजनीति में नए सियासी बदलाव का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। दशकों तक छिंदवाड़ा की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रहे कमलनाथ के प्रभाव को चुनौती मिलने के बाद कांग्रेस ने अब संगठन की कमान नए तरीके से संभालने की कवायद शुरू कर दी है।

लोकसभा चुनाव 2024 तक छिंदवाड़ा को अक्सर कमलनाथ और कांग्रेस के मजबूत राजनीतिक गढ़ के तौर पर देखा जाता था। लेकिन नकुलनाथ की हार के बाद यहां का सियासी समीकरण तेजी से बदला। कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने जनाधार को दोबारा मजबूत करने की है।

इसी रणनीति के तहत मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने छिंदवाड़ा पर विशेष फोकस बढ़ाया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अब छिंदवाड़ा की राजनीति को किसी एक परिवार के प्रभाव से आगे ले जाकर संगठन के स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

वरिष्ठ पत्रकार मनीष तिवारी के मुताबिक, लंबे समय तक छिंदवाड़ा में कांग्रेस की राजनीति का मतलब कमलनाथ ही हुआ करता था। टिकट वितरण से लेकर संगठनात्मक फैसलों तक उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। लेकिन बदले राजनीतिक हालात के बाद अब कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व छिंदवाड़ा में अपनी भूमिका को ज्यादा सक्रिय कर रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जीतू पटवारी छिंदवाड़ा में कांग्रेस का खोया हुआ सियासी प्रभाव वापस ला पाएंगे, या कमलनाथ के बाद कांग्रेस के सामने यहां नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो चुकी है?

आने वाले चुनावों में छिंदवाड़ा का सियासी मुकाबला इस बात का फैसला करेगा कि यह इलाका फिर कांग्रेस के पुराने प्रभाव में लौटता है या मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखता है।

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