कलेक्टर के सामने खुली पाली स्वास्थ्य विभाग की पोल, मरीज को इंजेक्शन तक नहीं दे पाया आरोग्य मंदिर

ग्रामीणों को गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच पाली विकासखंड के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मालाचुआ गांव के आरोग्य मंदिर में एक महिला को टिटनेस का इंजेक्शन और जरूरी दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हो सकीं। हालात इतने खराब रहे कि महिला को इंजेक्शन बाहर से खरीदकर लाने के लिए कह दिया गया।

मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब कलेक्टर राखी सहाय निरीक्षण के दौरान आरोग्य मंदिर पहुंचीं। महिला ने कलेक्टर के सामने स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यप्रणाली की शिकायत रखी और बताया कि उसे आवश्यक इंजेक्शन के लिए बाहर भेजा गया तथा दवाइयां भी उपलब्ध नहीं कराई गईं।

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बनाए गए आरोग्य मंदिर में यदि मरीज को सामान्य उपचार के लिए भी बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, तो फिर इन केंद्रों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयां और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है, लेकिन मालाचुआ में सामने आई स्थिति ने विभागीय दावों की हकीकत उजागर कर दी।

महिला की शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को संबंधित तीन एएनएम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कलेक्टर के निरीक्षण में सामने आई यह स्थिति पाली स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

सवाल यह है कि यदि कलेक्टर का निरीक्षण नहीं होता तो क्या महिला की शिकायत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचती, क्या ग्रामीण मरीजों को इसी तरह जरूरी दवाइयों और इंजेक्शन के लिए बाजार का चक्कर लगाना पड़ता, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं की नियमित निगरानी आखिर कौन कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के साथ पशु चिकित्सा व्यवस्था भी सवालों में

कलेक्टर के निरीक्षण में पशु चिकित्सा विभाग की व्यवस्थाओं में भी लापरवाही सामने आई। जानकारी मिली कि गांव में पदस्थ एवीएफओ और पशु चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी नियमित रूप से गांव नहीं पहुंच रहे थे। इस पर कलेक्टर ने संबंधित एवीएफओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

एक ही निरीक्षण में स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा विभाग की व्यवस्थाओं में खामियां सामने आना प्रशासनिक निगरानी की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीण इलाकों में सरकारी सेवाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करना विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

मालाचुआ की घटना ने पाली स्वास्थ्य विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर जरूर सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि तीन एएनएम पर कार्रवाई और संबंधित अधिकारी को नोटिस तक सीमित रहने वाली कार्रवाई होती है या विभाग अपनी व्यवस्था में वास्तविक सुधार भी करता है।

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