छह महीने बाद दोबारा हाथियों की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग ने शुरू की सतत निगरानी

मऊगंज से फिर सीधी की सीमा में पहुंचे दो हाथी, तुर्रा पहाड़ से पटपरा की ओर बढ़ा दल

छह महीने बाद दोबारा हाथियों की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग ने शुरू की सतत निगरानी

एमपी के सीधी जिले के कमर्जी थाना क्षेत्र में एक बार फिर हाथियों के दल की दस्तक से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। मऊगंज जिले की ओर से दो हाथियों का दल सीधी जिले की सीमा में प्रवेश कर गया है। बताया यह भी जा रहा है कि हाथी तुर्रा पहाड़ के रास्ते पटपरा क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले दो दिनों से हाथियों की मौजूदगी सीमा क्षेत्र में बनी हुई थी, जिसके बाद मंगलवार सुबह करीब 4 बजे ग्रामीणों ने हाथियों को देखा और इसकी सूचना वन विभाग की टीम को दी।

इन हाथियों की सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया है और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग की कोशिश है कि हाथियों को जंगल और पहाड़ी क्षेत्र तक ही सीमित रखा जाए, ताकि वे रिहायशी इलाकों में प्रवेश न करें और किसी तरह की जनहानि या फसलों को नुकसान की स्थिति पैदा न हो।

जहा वन विभाग के बीट प्रभारी पंकज मिश्रा ने बताया कि सीधी जिले की सीमा में दो हाथियों के पहुंचने की जानकारी मिली है। टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। वही हाथियों को जंगल की ओर रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करें। वन विभाग की टीम उनकी गतिविधियों पर सतत नजर बनाए हुए है।

छह महीने पहले भी मचा चुके हैं भारी तबाही

गौरतलब है कि यह करीब छह महीने पहले भी हाथियों का दल सीधी, मऊगंज और मैहर जिले के अलग-अलग इलाकों में घूमता रहा था। उस दौरान हाथियों ने कई जगहों पर घरों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में दोबारा हाथियों के सीधी जिले की सीमा में आने से ग्रामीणों में डर का माहौल है।

वही स्थानीय निवासी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि हाथियों का दल सीधी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही लोग वन विभाग को तत्काल सूचना दें और बिना जोखिम उठाए अपने घरों व आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रखने के प्रयास करें।

जहा वन विभाग ने भी ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के नजदीक जाने, उन्हें घेरने या छेड़ने से बचें। उनकी गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग की टीम को सूचना दें, ताकि समय रहते हाथियों की दिशा पर नजर रखते हुए उन्हें आबादी से दूर रखा जा सके।

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