शौचालय की मंजूरी के बदले रिश्वत का खेल, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को 3 साल की सजा
हर शौचालय पर 500 रुपये मांगने का आरोप, 13 शौचालयों के लिए मांगे थे 6500 रुपये; 2020 में लोकायुक्त ने रंगे हाथ पकड़ा
छतरपुर। शौचालय निर्माण की प्रक्रिया में मंजूरी के नाम पर रिश्वत मांगने के करीब छह साल पुराने मामले में छतरपुर जनपद पंचायत की तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी को अदालत ने दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय में न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। एक रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
13 शौचालयों के लिए मांगी गई थी 6500 रुपये की रकम
अभियोजन के मुताबिक मामला जनपद पंचायत छतरपुर की ग्राम पंचायत धौरी से जुड़ा है। यहां रोजगार सहायक के पद पर पदस्थ जितेंद्र सिंह ने लोकायुक्त में शिकायत की थी। बताया गया कि स्वच्छता अभियान के तहत बनाए गए 13 शौचालयों की तस्वीरें संबंधित एप पर अपलोड की गई थीं। आगे की प्रक्रिया के लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटर की मंजूरी जरूरी थी।
आरोप था कि नीलम तिवारी ने प्रत्येक शौचालय के अनुमोदन के एवज में 500 रुपये की मांग की। 13 शौचालयों के हिसाब से यह राशि 6500 रुपये बताई गई। शिकायतकर्ता द्वारा रकम देने से इनकार किए जाने पर मंजूरी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाए जाने का आरोप भी सामने आया।
18 फरवरी 2020 को लोकायुक्त ने किया था ट्रैप
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन किया और इसके बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। 18 फरवरी 2020 को लोकायुक्त सागर की टीम ने कार्रवाई करते हुए नीलम तिवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। मामले में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी माना।
छह साल बाद आया फैसला, अपील का रास्ता खुला
लोकायुक्त की कार्रवाई के करीब छह साल बाद अदालत का फैसला सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक तीन साल की सजा होने के कारण नीलम तिवारी को उच्च न्यायालय में अपील के लिए तत्काल जमानत का लाभ मिला है। निर्धारित अवधि में अपील नहीं किए जाने की स्थिति में उन्हें सजा भुगतने के लिए जेल जाना पड़ सकता है।