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470 साल पुराने इस महल को बनवाने के लिए लगे थे 32 मिलियन डॉलर

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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History of Tajmahal: एक ऐसा सुल्तान जो दुनिया में था सबसे अमीर जिसने बनवाया एक ऐसा महल जिसे आज भी याद करती है पूरी दुनिया। भारत देश में अनेक राजा महाराजा सुल्तान हुए हैं जिन्होंने अपने आप को इतिहास में याद रखने के लिए कुछ ना कुछ कार्य जरूर किया है लेकिन ऐसे ही आज हम एक बादशाह के बारे में बताने वाले हैं जो पूरी दुनिया में मशहूर था हालांकि उसे आयस बादशाह के नाम से भी जाना जाता था लेकिन फिर भी उसके किए गए कार्यों और उनकी उपलब्धियां को आज भी पूरी दुनिया लोहा मानती है।

History of Tajmahal: हम बात कर रहे हैं मुगल साम्राज्य की जहां मुगल साम्राज्य के अकबर के बेटे के नाम से मशहूर यह सुल्तान काफी बेहद खास है। शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान मुग़ल साम्राज्य दुनिया के सबसे अमीर साम्राज्यों में से एक था। इस बेजोड़ भव्य स्मारक को बनाने के लिए उन्हें उपकरण किसने दिया। वह चाहते थे कि यह अद्भुत हो, लेकिन वह यह भी चाहते थे कि यह जल्दी बने।

जहा यह अनुमानतः 20,000 मजदूरों को लाकर मुमताजाबाद में पास ही रखा गया। वही उत्पादन में तेजी लाने के लिए विशेष रूप से उनके लिए बनाया गया एक शहर। अनुभवी और अनुभवहीन कारीगरों को काम पर रखा गया था। यह काफी विशाल है, 624 फुट लम्बा प्लिथ या आधार पहले बनाया गया था, फिर उसके बाद नींव बनायी गयी थी।

History of Tajmahal: आपको बतादे की इसे 1632 में मुगल सम्राट शाहजहाँ (1628 से 1658 तक शासन किया) ने अपनी पसंदीदा दुबली-पतली मुमताज महल की कब्र के लिए शुरू करवाया था। जहा मकबरा एक 17-हेक्टेयर (42 एकड़) परिसर का केंद्र बिंदु है, जिसमें एक मस्जिद और एक गेस्ट हाउस भी शामिल है। इसके अलावा यह तीन तरफ एक अनियंत्रित दीवार से घिरे एक औपचारिक बगीचे में स्थापित है।

इसके अलावा इसमें कब्र का निर्माण अनिवार्य रूप से 1643 में पूरा किया गया लेकिन परियोजना के अन्य चरणों में 10 वर्षों तक काम जारी रहा है। ऐसा माना जाता है कि ताज महल 1653 में लगभग 32 मिलियन की अनुमानित लागत पर पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया था, जो 2015 में लगभग 52.8 बिलियन रुपये (US$427 मिलियन) रहा होगा। जहा निर्माण परियोजना में आर्किटेक्ट्स बोर्ड के मार्गदर्शन में लगभग 20,000 कारीगरों को रोजगार मिला था। सम्राट के दरबार के वास्तुकार, उस्ताद अहमद लाहौरी के नेतृत्व में।

सोर्स : (इंडो-इस्लामिक हेरिटेज सेंटर)

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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