Sidhi news:सीधी में भेड़पालन से बदली किस्मत, 50 साल की मेहनत से रामप्रसाद पाल बने ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल
Sidhi news:मध्य प्रदेश के सीधी जिले में खेती के साथ अब पशुपालन भी ग्रामीणों की आमदनी का मजबूत आधार बनता जा रहा है। खासतौर पर भेड़पालन ने कई किसानों की आर्थिक स्थिति को नई दिशा दी है। चुरहट क्षेत्र के किसान रामप्रसाद पाल इसका जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने बीते करीब 50 वर्षों से भेड़पालन को अपनाकर न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
रामप्रसाद पाल ने भेड़पालन की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से की थी। उन्होंने केवल एक देसी नस्ल की भेड़ से अपना काम शुरू किया और धीरे-धीरे अनुभव, मेहनत और सही देखभाल के दम पर इसे एक लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया। आज उनके पास करीब 70 देसी नस्ल की भेड़ें हैं, जो उनकी नियमित आय का मुख्य साधन बनी हुई हैं। भेड़पालन से उन्हें सालभर स्थिर आमदनी मिलती है, जिससे घर-परिवार का खर्च आसानी से निकल जाता है।
Sidhi news:रामप्रसाद पाल ने e7live से बातचीत में बताया कि हर साल औसतन 25 भेड़ों के बच्चे बिक जाते हैं। इससे उन्हें अच्छी-खासी आमदनी हो जाती है। खास बात यह है कि उन्हें भेड़ या मेमने बेचने के लिए मंडी नहीं जाना पड़ता। खरीदार खुद उनके घर तक पहुंच जाते हैं और सौदा वहीं तय हो जाता है। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है।
रामप्रसाद के अनुसार, भेड़पालन कोई बहुत कठिन काम नहीं है। बस नियमित देखभाल, साफ-सफाई और सही खान-पान जरूरी है। वे देसी नस्ल की भेड़ों को सबसे उपयुक्त मानते हैं, क्योंकि ये स्थानीय मौसम में आसानी से ढल जाती हैं, बीमार कम पड़ती हैं और इनका रखरखाव भी कम खर्च में हो जाता है। देसी भेड़ों को स्थानीय चारा, हरा चारा और सूखा भूसा देकर आसानी से पाला जा सकता है।
सीधी जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ. सलिल कुमार पाठक बताते हैं कि भेड़ों के लिए खुली, साफ और हवादार जगह बेहद जरूरी होती है। दिन में भेड़ों को चराई के लिए बाहर ले जाना चाहिए और शाम को सुरक्षित बाड़े में बांधना चाहिए। साफ पानी की उपलब्धता हर समय जरूरी है। सर्दियों में भेड़ों को ठंडी हवा से बचाने के लिए बाड़े को ढकना और सूखा बिछावन देना चाहिए, खासकर छोटे मेमनों के लिए।
रामप्रसाद पाल बताते हैं कि आमतौर पर 12 महीने में भेड़ या उसका बच्चा बेचने लायक हो जाता है। अच्छी देखभाल से वजन तेजी से बढ़ता है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। एक अच्छी देसी भेड़ 7 से 8 हजार रुपये तक बिक जाती है। वे हर छह महीने में 15 से 20 भेड़ बेच लेते हैं, जिससे पूरे साल नियमित आमदनी बनी रहती है। यही कारण है कि आज सीधी जिले में भेड़पालन किसानों के लिए एक भरोसेमंद और लाभकारी व्यवसाय बनकर उभर रहा है।
