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एक कॉल… एक बिल… और 1.47 लाख गायब! चंदिया में सामने आया ऐसा मामला जिसने सबको चौंका दिया

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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एक कॉल… एक बिल… और 1.47 लाख गायब! चंदिया में सामने आया ऐसा मामला जिसने सबको चौंका दिया

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले के चंदिया थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ऑनलाइन खरीदारी और गूगल सर्च पर आंख मूंदकर भरोसा करने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सीमेंट की जरूरत, गूगल पर खोज, भरोसे भरी बातचीत और फिर कुछ ही पलों में बैंक खाते से 1 लाख 47 हजार 200 रुपये गायब। जब हकीकत सामने आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मामले के फरियादी राजकुमार यादव पिता मीरसिंह यादव, उम्र 51 वर्ष हैं, जो वर्तमान में बी-718 सुशांत लोक, गुरुग्राम (हरियाणा) के निवासी हैं। उनका दयाल स्टोन क्रेशर प्राइवेट लिमिटेड उमरिया जिले के ग्राम राघौपुर ददरा, चंदिया में संचालित है। क्रेशर के संचालन के लिए उन्हें बड़ी मात्रा में सीमेंट की आवश्यकता थी।

सीमेंट की जरूरत पूरी करने के लिए फरियादी ने गूगल पर अंबुजा सीमेंट का डीलर सर्च किया। सर्च के दौरान मिले एक मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को अधिकृत सप्लायर बताया और भरोसे के साथ सीमेंट उपलब्ध कराने की बात कही। बातचीत इतनी सहज और पेशेवर थी कि किसी तरह का शक होने की गुंजाइश ही नहीं दिखी।

कुछ ही देर में कथित डीलर की ओर से एक बिल भेजा गया। बिल देखने में पूरी तरह असली और व्यवस्थित था, जिससे फरियादी का भरोसा और पक्का हो गया। बिना ज्यादा संदेह किए फरियादी ने बैंक के माध्यम से 1,47,200 रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए।

भुगतान के बाद फरियादी को उम्मीद थी कि जल्द ही सीमेंट की सप्लाई साइट पर पहुंच जाएगी। लेकिन एक दिन बीता, फिर दूसरा, फिर कई दिन गुजर गए। न सीमेंट आई और न ही सप्लायर की तरफ से कोई ठोस जवाब मिला। फोन करने पर कभी नेटवर्क की बात कही गई तो कभी डिलीवरी में देरी का बहाना बनाया गया।

जब इंतजार हद से ज्यादा बढ़ गया तो फरियादी ने दोबारा संपर्क करना चाहा, लेकिन इस बार फोन या तो बंद आने लगा या कोई जवाब नहीं मिला। तभी उन्हें एहसास हुआ कि वे किसी बड़े जाल में फंस चुके हैं।

इसके बाद राजकुमार यादव ने चंदिया थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी जे.एस. परस्ती ने जानकारी दी कि शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 37/26 दर्ज किया गया है। प्रकरण भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2) और 318(4) के तहत कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस अब संबंधित बैंक खाते, मोबाइल नंबर और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है। यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी की कहानी है, बल्कि उन सभी के लिए चेतावनी है जो गूगल पर मिले नंबरों को बिना जांचे-परखे भरोसे का आधार बना लेते हैं। एक छोटी सी लापरवाही कब बड़ी कीमत वसूल ले, इसका अंदाजा इस घटना से साफ लगाया जा सकता है।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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