चंदिया थाना की धीमी चाल, चोरों की तेज रफ्तार, आठ महीने तक सोती रही एफआईआर
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के चंदिया थाना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला बिजली विभाग की लाखों की चोरी का है, लेकिन चर्चा चोरी से ज्यादा पुलिस की देरी को लेकर हो रही है। जून 2025 में हुई वारदात की एफआईआर फरवरी 2026 में दर्ज होती है। यानी पूरे आठ महीने तक फाइलें चलती रहीं या यूं कहें कि चली ही नहीं।
गांवों से गायब हुए तार, थाने में गायब रही तत्परता
रामपुर क्षेत्र के नरियरा हार में छह पोल के बीच करीब 1200 मीटर विद्युत तार उखाड़ लिए गए। रामपुर बंधवा में 63 केव्हीए और 25 केव्हीए ट्रांसफार्मरों से तेल और बाइंडिंग क्वाइल निकाल ली गई। बरबपुर और रोझिन गांवों में भी पोलों के बीच से केबल काट लिए गए। कुल नुकसान लगभग दो लाख आठ हजार रुपये का बताया गया है।
घटना 17 जून से 22 जून 2025 के बीच की है। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत उसी समय चंदिया थाना में दे दी गई थी। अगर ऐसा है तो फिर एफआईआर दर्ज करने में आठ महीने क्यों लगे?
शिकायत थी, लेकिन कार्रवाई नहीं
वर्तमान कनिष्ठ अभियंता महेंद्र सिंह का कहना है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता एस.के. गुप्ता ने जून में ही लिखित आवेदन दे दिया था। आरोप है कि आवेदन थाने में पड़ा रहा, लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ।
चंदिया थाना प्रभारी जेएस सिंह परस्ते का कहना है कि पूर्व थाना प्रभारी के समय यह मामला दर्ज नहीं किया गया। उनके अनुसार, जैसे ही उन्हें जानकारी मिली, तुरंत धारा 303(2) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
सवाल सीधे चंदिया थाना पर
सरकारी संपत्ति की चोरी कोई मामूली मामला नहीं होता। यह जनता के पैसे से जुड़ा सवाल है। ऐसे में अगर शिकायत महीनों तक थाने में पड़ी रहे तो यह सिर्फ देरी नहीं, व्यवस्था की गंभीर कमजोरी मानी जाएगी।
अगर जून में ही एफआईआर दर्ज हो जाती तो जांच समय पर शुरू होती। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जाते, संदिग्धों से पूछताछ होती और शायद चोरों तक पहुंच बनाई जा सकती थी। लेकिन देरी ने जांच को भी कमजोर कर दिया।
अब जांच की बात, पर भरोसा कैसे लौटे?
चंदिया थाना अब जांच की बात कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आठ महीने की चुप्पी का जिम्मेदार कौन है? क्या सिर्फ समय बीत जाने से जवाबदेही भी खत्म हो जाती है?
यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर उठते गंभीर सवालों का है। जब कानून लागू करने वाली एजेंसी ही सुस्ती दिखाए, तो अपराधियों को डर किस बात का रहेगा? अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस देरी की भी जांच होगी या मामला सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाएगा।


