कैमरे सो गए, नगर जाग रहा है पाली में सुरक्षा व्यवस्था खुद निगरानी की मोहताज
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के पाली नगर में सुरक्षा के नाम पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे इन दिनों खुद ही सुरक्षा मांगते नजर आ रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से शहर के प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगाए गए 36 कैमरों में से सिर्फ 7 ही चालू हैं। बाकी कैमरे या तो बंद पड़े हैं या फिर औपचारिकता निभा रहे हैं।
नगरवासियों का कहना है कि कैमरे लगते वक्त खूब चर्चा हुई थी। दावा किया गया था कि अब अपराध पर नजर रहेगी, असामाजिक तत्वों पर लगाम लगेगी और शहर सुरक्षित होगा। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर कैमरे महीनों से बंद हैं और रखरखाव के अभाव में शोपीस बन चुके हैं।
विडंबना यह है कि इन कैमरों की मॉनिटरिंग पाली थाना से की जाती है। ऐसे में जब कैमरे ही बंद हों तो निगरानी किस बात की? सूत्र बताते हैं कि कई बार तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस की समस्या की जानकारी संबंधित जिम्मेदारों को दी गई, लेकिन सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
नगर पालिका परिषद की कार्यशैली पर अब सवाल उठने लगे हैं। जनता पूछ रही है कि जब लाखों रुपये खर्च हुए तो उनका हिसाब कौन देगा? सुरक्षा के नाम पर खर्च हुई राशि का फायदा आखिर किसे मिला?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इन कैमरों की मरम्मत और नियमित देखरेख नहीं की गई, तो पूरा सिस्टम बेकार हो जाएगा। ऐसे में अपराध की स्थिति में सबूत जुटाना भी मुश्किल होगा।
अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेती है। फिलहाल पाली नगर में हालात कुछ यूं हैं कि कैमरे खामोश हैं और जिम्मेदार भी। सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है, और कैमरे… शायद अगली मरम्मत की तारीख का इंतजार कर रहे हैं।


