बाघों की धरती पर गिद्धों की गूंज: बाँधवगढ़ में तीन दिन चला पक्षी प्रहरी अभियान
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के प्रसिद्ध बाँधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में इस बार सिर्फ बाघों की नहीं, बल्कि आसमान के सफाईकर्मियों की भी गिनती हुई। तीन दिवसीय गिद्ध गणना अभियान 20 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक चला और रविवार को इसका सफल समापन हुआ। तीन दिनों तक जंगल के हर हिस्से में हलचल रही, जहां वनकर्मी दूरबीन और मोबाइल ऐप के साथ लगातार निगरानी में जुटे रहे।
यह अभियान रिज़र्व के चार उप वनमंडलों के नौ परिक्षेत्रों और 139 बीटों में संचालित किया गया। करीब 400 से अधिक फील्ड स्टाफ ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच गिद्धों की तलाश की। वहीं लगभग 60 वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग अलग स्थानों पर मौजूद रहकर पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की। यह समन्वय बताता है कि वन विभाग अब पक्षी संरक्षण को भी उतनी ही गंभीरता से ले रहा है जितनी बड़े वन्यजीवों को।
गणना की इस प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया। निर्धारित प्रपत्रों के साथ मोबाइल ऐप Epicollect5 का उपयोग किया गया, जिससे फील्ड से ही आंकड़े सीधे दर्ज हुए और मुख्यालय स्तर पर रियल टाइम निगरानी संभव हो सकी। इससे आंकड़ों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों मजबूत हुईं।
तीन दिनों की मेहनत के बाद जो आंकड़े सामने आए, वे उत्साह बढ़ाने वाले हैं। बाँधवगढ़ क्षेत्र में कुल 276 गिद्ध दर्ज किए गए। इनमें राज गिद्ध 17, देसी गिद्ध 237, इजिप्शियन गिद्ध 14 और सफेद पीठ गिद्ध 8 पाए गए। ये गिद्ध 38 अलग अलग स्थानों पर बैठे हुए नजर आए। नियमों के अनुसार केवल स्थिर अवस्था में बैठे गिद्धों को ही गिनती में शामिल किया गया, उड़ते हुए पक्षियों को नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जंगल में गिद्धों की मौजूदगी उस क्षेत्र के स्वस्थ पारिस्थितिक संतुलन का संकेत होती है। गिद्ध मृत जानवरों को खाकर वातावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं और कई बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं। ऐसे में चार प्रजातियों का एक साथ दिखना इस बात का प्रमाण है कि बाँधवगढ़ का पारिस्थितिक तंत्र मजबूत है।
बाँधवगढ़ टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने इस सफल अभियान को टीमवर्क और तकनीक के बेहतर उपयोग का परिणाम बताया है। बाघों की धरती अब गिद्धों की सुरक्षित शरणस्थली के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रही है।


