कब्जा दिलाने के बाद बुलडोजर से उजड़ा आशियाना, 3 बेटियों संग सड़क पर रहने को मजबूर दंपत्ति, सुनील सिंह पर गुंडागर्दी के आरोप
एमपी के सीधी जिले के चुरहट कस्बे के बिछी रोड से एक संवेदनशील और विवादित मामला सामने आया है, जहां कब्जा विवाद के बाद एक गरीब परिवार का आशियाना बुलडोजर से गिरा दिया गया। घर उजड़ने के बाद पीड़ित दंपत्ति अपनी तीन बेटियों के साथ पिछले चार दिनों से खुले आसमान के नीचे सड़क पर रहने को मजबूर हैं। परिवार को अब अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता सता रही है।
वही पीड़ित महिला सीमा अवधिया ने बताया कि वह लगभग 20 वर्षों से इस मकान में रह रही थीं, जबकि उनके ससुर करीब 30 वर्षों से वहीं निवास कर रहे थे। उनके अनुसार कुल मिलाकर लगभग 50 वर्षों से उनका परिवार इस जगह पर रह रहा था। सीमा का आरोप है कि जमीन को लेकर विवाद न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह कोर्ट में अपनी पैरवी सही ढंग से नहीं कर सकीं।
वही सीमा अवधिया का कहना है कि अदालत ने केवल मकान का कब्जा सुनील सिंह को दिलाने का आदेश दिया था, लेकिन घर गिराने का कोई आदेश नहीं दिया गया था। इसके बावजूद सुनील सिंह ने मौका देखकर बुलडोजर चलवा दिया, जिससे उनका पूरा मकान ढह गया और घर के अंदर रखा सामान भी मलबे में दब गया। अब वह अपनी तीन बेटियों के साथ खुले में रह रही हैं। उनका आरोप है कि आसपास के कुछ लोग उन्हें गालियां देकर और धमकाकर वहां से भगाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे परिवार डर के साए में जी रहा है।
वही इस मामले में चुरहट तहसीलदार साक्षी गौतम ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार प्रशासन ने केवल जमीन का कब्जा दिलाने की कार्रवाई की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मकान गिराने के लिए प्रशासन की ओर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। तहसीलदार के अनुसार यदि पीड़ित पक्ष की ओर से आवेदन दिया जाता है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस बारे मे सुनील सिंह ने अपने बयान में कहा कि यह मकान उनका था और प्रशासन ने उन्हें कब्जा दिलाया है। इसलिए वह अपने घर के साथ जो चाहें कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई जबरदस्ती करेगा तो वह भी पीछे हटने वाले नहीं हैं।
वही इधर पीड़ित परिवार ने बुधवार को तहसीलदार को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल तीन मासूम बेटियों के साथ सड़क पर रहने को मजबूर इस परिवार की स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था और संवेदनशीलता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

