64 ग्राम का कमाल,तमिलनाडु के छात्र ने बनाया दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट, अंतरिक्ष में रचा इतिहास
भारत के तमिलनाडु के युवा छात्र Rifath Sharook ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी मुश्किल लगती है। मात्र 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट “KalamSat” तैयार कर अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिया। इस सैटेलाइट का वजन केवल 64 ग्राम है—जो एक सामान्य मोबाइल फोन से भी कम है।
वही इस अनोखे सैटेलाइट को NASA की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता “Cubes in Space” के लिए तैयार किया गया था। इस प्रतियोगिता में 57 देशों से हजारों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, लेकिन रिफत का इनोवेशन सबसे अलग और प्रभावशाली साबित हुआ। 22 जून 2017 को NASA ने इसे अमेरिका के वर्जीनिया स्थित अपने लॉन्च स्टेशन से अंतरिक्ष में भेजा, जो किसी भारतीय छात्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
“KalamSat” को महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति A. P. J. Abdul Kalam के सम्मान में नाम दिया गया है। जहा यह सैटेलाइट पूरी तरह 3D प्रिंटिंग तकनीक से बनाया गया था और इसमें कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह बेहद हल्का और मजबूत बन सका। इस सैटेलाइट का उद्देश्य माइक्रोग्रैविटी (सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण) में नई तकनीकों का परीक्षण करना था।
जहा रिफत शारुक की इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर प्रतिभा और जुनून हो, तो कोई भी युवा वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकता है। यह उपलब्धि भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और देश में विज्ञान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत को भी उजागर करती है।
वही आज के दौर में जब देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे युवा वैज्ञानिक भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। सरकार और शैक्षणिक संस्थानों को चाहिए कि वे ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को सही मंच और संसाधन उपलब्ध कराएं, ताकि आने वाले समय में भारत अंतरिक्ष विज्ञान में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सके।
जहा रिफत की यह कहानी हर उस युवा के लिए संदेश है जो बड़े सपने देखता है,अगर इरादे मजबूत हों, तो सफलता जरूर मिलती है।

