“जनसुनवाई या जनपीड़ा? 500 लोगों को 4 फीट के रास्ते में घंटों खड़ा रख प्रशासन ने बनाई ‘भेड़-बकरी’ जैसी स्थिति, दिव्यांग और बुजुर्ग भी हुए बेबस”
सीधी जिले के जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में व्यवस्थाओं की पोल खुलकर सामने आ गई। जिलेभर से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे सैकड़ों लोगों को राहत मिलने के बजाय घंटों अव्यवस्था, धक्का-मुक्की और अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे थे कि करीब 500 से अधिक आवेदकों को केवल 4 फीट चौड़े रास्ते में खड़ा कर उनकी बारी का इंतजार कराया गया। एक बार में केवल 15 लोगों को अंदर प्रवेश दिया जा रहा था, जिससे बाहर भारी भीड़ जमा हो गई।
जनसुनवाई में सिहावल, बहरी, कुसमी, मझौली, चुरहट और रामपुर नैकिन जैसे लगभग 100 किलोमीटर दूर क्षेत्रों से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां न बैठने की समुचित व्यवस्था थी और न ही पीने के पानी की। पूरे परिसर में केवल 9 कुर्सियां रखी गई थीं, जिन पर कुछ ही लोग बैठ पाए जबकि सैकड़ों लोग घंटों खड़े रहने को मजबूर रहे।
सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को हुई। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग लाइन तक नहीं बनाई गई थी। दिव्यांग व्यक्तियों को भी उसी भीड़भाड़ वाले रास्ते से गुजरना पड़ा, जहां कई लोग अंदर तक पहुंच ही नहीं पाए। कई आवेदकों ने आरोप लगाया कि उन्हें “भेड़-बकरी की तरह” अंदर धकेला जा रहा था।
भगवानपुर निवासी श्यामलाल साहू ने बताया कि वे अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे, लेकिन भीड़ और धक्का-मुक्की के कारण अंदर नहीं जा सके। वहीं महखोर निवासी रोहित गुप्ता ने आरोप लगाया कि वे अपने दिव्यांग पिता को लेकर आए थे, लेकिन प्रशासनिक कर्मचारियों ने उन्हें अंदर तक नहीं जाने दिया।
दिव्यांग मुन्नालाल साकेत, जिनका एक पैर नहीं है, ट्राई साइकिल की मांग लेकर जनसुनवाई पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि भीड़ में उन्हें धक्का देकर बाहर कर दिया गया और वे कलेक्टर तक अपनी बात नहीं पहुंचा सके।
जनसुनवाई में फैली अव्यवस्था को लेकर जब जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सोलंकी से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
जनसुनवाई का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना होता है, लेकिन सीधी में आयोजित यह जनसुनवाई खुद लोगों की परेशानी का कारण बन गई। सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासन आम जनता की शिकायत सुनने के लिए बुनियादी व्यवस्थाएं तक नहीं कर पा रहा, तो समस्याओं के समाधान की उम्मीद आखिर कैसे की जाए।

