“8 घंटे तक थाना परिसर में खड़ी रही बिना TP की रेत गाड़ी… फिर आया एक फोन और पूरा मामला ‘सेट’ हो गया?”
सीधी जिले में रेत परिवहन को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कार्रवाई और ‘सेटिंग’ के बीच की रेखा पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बिना ट्रांजिट पास (TP) के पकड़ी गई रेत से भरी गाड़ी करीब 8 घंटे तक थाना परिसर में खड़ी रही, लेकिन कार्रवाई का इंतजार करते-करते मामला अचानक ठंडा पड़ गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक गाड़ी को रोकने के बाद शुरुआत में माहौल ऐसा था मानो बड़ी कार्रवाई होने वाली हो। थाना परिसर में खड़ी गाड़ी को देखने वालों की भीड़ लगी रही और चर्चा चलती रही कि इस बार नियमों के मुताबिक सख्त कदम उठाया जाएगा। लेकिन घंटे बीतते गए, कार्रवाई फाइलों से बाहर नहीं निकली।
फिर अचानक एक फोन आया… और कहानी ने नया मोड़ ले लिया।
चश्मदीदों का दावा है कि फोन कॉल के बाद थाना परिसर का माहौल ही बदल गया। जो गाड़ी कुछ देर पहले तक ‘बिना TP की अवैध रेत गाड़ी’ बताई जा रही थी, वही धीरे-धीरे सामान्य मामला बन गई। सवाल यह उठ रहा है कि यदि दस्तावेज पूरे नहीं थे तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर सब कुछ वैध था तो गाड़ी को घंटों थाना में खड़ा रखने की जरूरत क्या थी?
क्षेत्र में अब यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग तंज कस रहे हैं कि सीधी में रेत का खेल अब नदी से ज्यादा फोन कॉल पर बहता है। यहां कानून की रफ्तार कागज देखकर नहीं, बल्कि मोबाइल की घंटी सुनकर तय होती दिखाई देती है।
पूरा घटनाक्रम कई सवाल छोड़ गया है—
क्या बिना TP रेत परिवहन पर कार्रवाई सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है?
क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के फोन के बाद मामला दबा दिया गया?
और सबसे बड़ा सवाल… थाना जांच कर रहा था या ‘समझौते’ का सही समय आने का इंतजार?
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं, लेकिन जनता के बीच यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि सीधी में रेत से ज्यादा मजबूत अब उसकी ‘सेटिंग व्यवस्था’ हो चुकी है।

