सुबह के अंधेरे में दौड़ रहा कोयले का खेल, बिना कागज पार हो रहे वाहन
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले में कोयले के परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक जिले से होकर गुजरने वाले कई कोयला वाहनों में परिवहन संबंधी जरूरी दस्तावेज नहीं पाए जाते, बावजूद इसके वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह खेल रोजाना भोर में ज्यादा सक्रिय रहता है, जब शहडोल की ओर से कटनी मार्ग की तरफ बड़ी संख्या में कोयला लोड वाहन निकलते हैं।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि कुछ ट्रकों के पास वैध कागजात मौजूद रहते हैं, लेकिन कई वाहन ऐसे भी होते हैं जिनमें परिवहन से जुड़े दस्तावेज नहीं होते। इसके बावजूद वाहन बिना किसी रोक-टोक के गुपचुप तरीके से निकल जाते हैं। ऐसे में परिवहन व्यवस्था और जांच प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारों की मानें तो इस पूरे नेटवर्क में शहडोल जिले के कुछ रसूखदार और नामी लोगों की भूमिका होने की चर्चा है। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन क्षेत्र में लंबे समय से इस तरह की चर्चाएं चल रही हैं। आरोप यह भी हैं कि बिना कागज वाले वाहनों को संरक्षण मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती।
कोयला परिवहन में ओवरलोडिंग का मुद्दा भी गंभीर बना हुआ है। कई वाहन क्षमता से अधिक कोयला भरकर सड़कों पर दौड़ते देखे जाते हैं। इससे न केवल सड़कें खराब हो रही हैं बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। भारी वाहनों के कारण ग्रामीण मार्गों और मुख्य सड़कों की हालत लगातार बिगड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन, खनिज विभाग और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से सुबह के समय सघन जांच अभियान चलाएं तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान फर्जी दस्तावेज, बिना रॉयल्टी परिवहन और ओवरलोडिंग जैसे मामले सामने आ सकते हैं।
वहीं इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभागों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि अगर नियमित जांच और सख्त कार्रवाई हो तो अवैध परिवहन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कथित ब्लैक रूट पर कब तक कार्रवाई होती है।


