“साहब, शिकायत झूठी नहीं है…” ₹200 के स्टांप और नोटरी के साथ जनसुनवाई पहुंचे फरियादी, कलेक्टर के पुराने बयान का दिया हवाला
सीधी जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय अनोखा दृश्य देखने को मिला जब कई आवेदक अपनी शिकायतों के साथ ₹200 के स्टांप पेपर और नोटरी कराए गए दस्तावेज लेकर पहुंचे। आवेदकों का कहना था कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि पूर्व में कलेक्टर द्वारा कथित रूप से कहा गया था कि यदि शिकायतें स्टांप पेपर पर लिखकर दी जाएं तो उन्हें अधिक विश्वसनीय माना जाएगा।
जनसुनवाई में पहुंचे अयोध्या प्रसाद मिश्रा, प्रत्यूष मिश्रा और हितेश मिश्रा ने अपनी शिकायतें स्टांप पेपर के साथ प्रस्तुत करते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। आवेदक अयोध्या प्रसाद मिश्रा ने बताया कि वे ग्राम बभनी के निवासी हैं और वहां पदस्थ पटवारी प्रवीण पांडे के खिलाफ लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पटवारी द्वारा गलत प्रतिवेदन तैयार कर प्रस्तुत किए जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अयोध्या प्रसाद मिश्रा का कहना है कि उन्होंने पहले जन चौपाल के माध्यम से भी अपनी शिकायत सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा तक पहुंचाई थी। उस दौरान कलेक्टर ने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि अधिकांश शिकायतें झूठी होती हैं और यदि कोई व्यक्ति ₹200 के स्टांप पेपर पर लिखकर शिकायत देगा तो उसे सही माना जाएगा। इसी कथन को आधार बनाते हुए उन्होंने अपनी शिकायत स्टांप पेपर पर तैयार कराई तथा करीब ₹100 खर्च कर नोटरी भी करवाई।
जनसुनवाई में मौजूद लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। कई लोगों का कहना था कि यदि शिकायतों की गंभीरता सिद्ध करने के लिए स्टांप पेपर की आवश्यकता पड़ रही है तो यह प्रशासन और जनता के बीच भरोसे के स्तर पर भी सवाल खड़े करता है।
वहीं इस पूरे मामले पर जब कलेक्टर विकास मिश्रा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने जनसुनवाई में व्यस्तता का हवाला देते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। बाद में फोन पर संपर्क करने की कोशिश भी की गई, लेकिन उनका जवाब प्राप्त नहीं हो सका।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्टांप पेपर पर दी गई इस शिकायत के बाद प्रशासन संबंधित आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

