NEET लीक ने मऊगंज की बेटी को मार डाला! सुसाइड नोट लिखकर फंदे पर झूली आकांक्षा, राहुल गांधी ने भिजवाई मदद…
मध्य प्रदेश: देश में जब-जब पेपर लीक होता है, तब-तब दिल्ली और भोपाल में बैठे हुक्मरान इसे सिर्फ एक ‘अव्यवस्था’ कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन मऊगंज की इस दर्दनाक दास्तान को सुनिए, जहाँ पेपर लीक ने सिर्फ एक परीक्षा को रद्द नहीं किया, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार की इकलौती उम्मीद का कत्ल कर दिया है।
मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी ने नागपुर के एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आकांक्षा का कसूर सिर्फ इतना था कि वह एक गरीब किसान की बेटी थी, जिसके पिता ने उसे डॉक्टर बनाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। पेपर अच्छा गया, नंबर अच्छे आ रहे थे, लेकिन जैसे ही ‘नीट पेपर लीक’ का महाघोटाला सामने आया, इस होनहार बेटी का हौसला टूट गया। और अब इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक सियासत सुलग उठी है। देखिए हमारी यह हिला देने वाली ग्राउंड रिपोर्ट।”
“तस्वीरों में दिख रही यह मासूम और मुस्कुराती हुई बेटी आकांक्षा चतुर्वेदी है, जो अब इस दुनिया में नहीं है। 20 मई 2026 की वो काली तारीख, जिसने इस परिवार को उम्र भर का गम दे दिया। मूल रूप से मऊगंज के मगनिया गांव का यह परिवार नागपुर में रह रहा था। पिता कृष्ण कुमार चौबे खुद भूखे रहकर, नागपुर में कुक (खाना बनाने) का काम करके अपनी बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को सींच रहे थे। बेटी भी दिन-रात ‘फिजिक्स वाला’ से नीट की तैयारी में जुटी थी।”
“नीट की परीक्षा देने के बाद आकांक्षा बेहद खुश थी, उसे यकीन था कि वो डॉक्टर बनकर पिता का कर्ज उतारेगी। लेकिन जैसे ही देश में नीट पेपर लीक की धांधली उजागर हुई, आकांक्षा गहरे डिप्रेशन में चली गई। उसने खाना-पीना छोड़ दिया और अंततः मौत को गले लगा लिया। मरने से पहले आकांक्षा ने जो सुसाइड नोट लिखा, वो सिस्टम को कटघरे में खड़ा करता है। उसने लिखा— ‘मम्मी-पापा, आपको भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लिखकर डॉक्टर बनेगी, पर दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर। पहले अच्छे मार्क्स आ रहे थे, लेकिन दोबारा अच्छा आए इसकी कोई गारंटी नहीं है। सॉरी मम्मी-पापा…’
बेटी को खो चुके इस गरीब परिवार के सिर पर 3 लाख रुपए का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का कर्ज और रिश्तेदारों की उधारी का बोझ है। इस महा-त्रासदी के बाद अब विपक्ष पूरी तरह एक्टिव हो गया है। बीती शाम युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार से फोन पर बात कराई। वहीं आज दिल्ली से सीधे एनएसयूआई (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े और प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे मऊगंज पहुंचे।”
“दुख की इस घड़ी में कांग्रेस और एनएसयूआई ने परिवार का हाथ थामा है। राहुल गांधी के निर्देश पर पीड़ित परिवार को 2.5 लाख रुपये की नकद आर्थिक सहायता सौंपी गई, साथ ही उनके 3 लाख रुपये के केसीसी कर्ज को भी चुकाने का लिखित वादा किया गया। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भी दूरभाष पर बात कर 1 लाख रुपये की अलग से आर्थिक मदद देकर हर संभव लड़ाई लड़ने का आश्वासन दिया है। कुल मिलाकर विपक्ष ने पीड़ित परिवार को साढ़े तीन लाख की मदद देकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।”
“आकांक्षा तो चली गई, लेकिन वो सरकार और इस देश के परीक्षा तंत्र से एक बड़ा सवाल पूछ कर गई है कि आखिर इन पेपर लीक माफियाओं की बलि और कितने छात्र चढ़ेंगे? नेताओं ने आर्थिक मदद तो दे दी, लेकिन क्या वो इस पिता को उसकी बेटी वापस लौटा पाएंगे?

