मध्यप्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ा: मोहन यादव सरकार फिर लेगी 2800 करोड़ का नया ऋण
विकास परियोजनाओं के लिए बाजार से जुटाए जाएंगे 2800 करोड़ रुपये, कुल देनदारी 5 लाख करोड़ के पार पहुंचने की संभावना
भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज लेने जा रही है। राज्य के वित्त विभाग ने राज्य विकास ऋण (State Development Loan) के तहत 2800 करोड़ रुपये जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए दो अलग-अलग बॉन्ड जारी किए जाएंगे, जिनकी नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर होगी।
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, 1600 करोड़ रुपये का पहला बॉन्ड 8 वर्ष की अवधि के लिए जारी किया जाएगा, जिस पर 7.64 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित की गई है। वहीं 1200 करोड़ रुपये का दूसरा बॉन्ड 22 वर्ष की अवधि का होगा, जिस पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
इस नए ऋण के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज करीब 13,800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। वित्तीय अनुमान बताते हैं कि प्रदेश पर कुल देनदारी 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
सरकार का कहना है कि इस राशि का उपयोग सड़क, सिंचाई, बिजली, जल संसाधन, संचार व्यवस्था और अन्य आधारभूत ढांचा विकास परियोजनाओं में किया जाएगा। इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृतियां भी प्राप्त हो चुकी हैं।
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश पर कुल कर्ज 4.88 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा था। अब नए ऋण के साथ यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि विकास कार्यों के लिए लिया गया कर्ज तब ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, जब उसका उपयोग पारदर्शी और परिणाम आधारित तरीके से किया जाए। अन्यथा बढ़ता ऋण भविष्य में सरकार के वित्तीय प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।

