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कमीशन का खेल या मरीजों की सेहत से खिलवाड़, उमरिया में 22 पैथोलॉजी बिना पंजीयन, जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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कमीशन का खेल या मरीजों की सेहत से खिलवाड़, उमरिया में 22 पैथोलॉजी बिना पंजीयन, जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार जिले में कुल 33 पैथोलॉजी लैब संचालित हो रही हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 11 पैथोलॉजी का ही वैध पंजीयन है। यानी करीब 22 पैथोलॉजी बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही हैं तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मरीजों की जान और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला भी है।

स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि बिना पंजीयन किसी भी पैथोलॉजी का संचालन न होने दिया जाए। इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में लैब खुलकर काम कर रही हैं। सवाल यह है कि जब इन संस्थानों का पंजीयन ही नहीं है तो आखिर इनके संचालन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं।

चर्चा यह भी है कि जिले में कई पैथोलॉजी केवल जांच के नाम पर कारोबार कर रही हैं। मरीजों को विभिन्न अस्पतालों और क्लीनिकों से जांच के लिए भेजा जाता है। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कमीशन का खेल भी चल रहा है। जांच के लिए मरीज जितने अधिक भेजे जाते हैं, उतना ही आर्थिक लाभ जुड़े लोगों को मिलता है। यही वजह है कि नियमों की अनदेखी कर कई अवैध पैथोलॉजी भी बेखौफ तरीके से संचालित हो रही हैं।

मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि कुछ अस्पतालों से पैथोलॉजी लैब को आवश्यक सामग्री भी विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का भी मामला बन सकता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि पैथोलॉजी रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर मरीज का इलाज तय करते हैं। यदि जांच किसी ऐसे संस्थान में हो रही है जो निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो गलत रिपोर्ट आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका सीधा असर मरीज के उपचार पर पड़ सकता है और कई बार गंभीर परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिले की सभी पैथोलॉजी लैब का भौतिक सत्यापन कराया जाए, उनके पंजीयन, उपकरणों, योग्य तकनीशियनों और गुणवत्ता मानकों की जांच की जाए। जो संस्थान नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना जरूरी है ताकि मरीजों के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।

इस पूरे मामले में जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वी. एस. चंदेल से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। यदि जांच में कोई पैथोलॉजी बिना पंजीयन या नियमों के विरुद्ध संचालित पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग की प्रस्तावित जांच पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजी लैब पर शिकंजा कसकर स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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