*ग्रामीण रोजगार और शहरी स्वास्थ्य की गारंटी है गाय:*
*मोगली पलटन की ‘कछुआ चाल 3.0’ का वैचारिक शंखनाद
*संजय सिंह मझौली*
हनुमानगढ़, 12 जुलाई 2026: तीन माह के रणनीतिक विश्राम के बाद बाल टोली ‘मोगली पलटन’ ने आज पुनः सड़कों पर उतरकर अपने अभियान का आगाज़ किया। संगठन द्वारा अपनी बहुप्रतीक्षित ‘कछुआ चाल साइकिल रैली 3.0’ की पहली मासिक रैली का सफलतापूर्वक आयोजन आज सुबह किया गया।रैली में पलटन के बाल सेनानियों के जोशीले नारे गालियों में ऊर्जा का संचार कर रहे थे । ‘गाय है तो गाँव है’ के मूल संकल्प पर केंद्रित यह अभियान अब एक सुदृढ़ बौद्धिक आंदोलन का रूप ले चुका है, जो ग्रामीण पारिस्थितिकी और आजीविका के अंतर्संबंधों पर एक नई वैचारिक दिशा प्रदान कर रहा है।
रैली का शुभारंभ ग्राम हनुमानगढ़ स्थित स्व० चन्द्रप्रताप तिवारी स्मारक स्थल से हुआ, जो गाँव के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए संपन्न हुई।
*ग्रामीण रोजगार और शहरी स्वास्थ्य का सेतु*
रैली के माध्यम से बाल टोली ने यह संदेश पुरज़ोर तरीके से साझा किया कि गाय केवल ग्रामीण आजीविका ही नहीं, बल्कि शहरी स्वास्थ्य की भी गारंटी है। बच्चों ने रेखांकित किया कि गाय के उत्पादों—जैसे दूध, गोबर और गौमूत्र—के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और डेयरी जैसे संधारणीय स्वरोज़गार के अवसर सृजित होते हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाते हैं। साथ ही, इन प्राकृतिक उत्पादों और शुद्ध गो-रस की उपलब्धता सीधे तौर पर शहरी आबादी को रसायनों के दुष्प्रभावों से बचाकर एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य ढांचा प्रदान करती है।
*सतत विकास की ‘कछुआ चाल’ अवधारणा*
‘कछुआ चाल’ का शीर्षक सतत विकास (Sustainable Development) के उस व्यावहारिक दर्शन को परिभाषित करता है, जहाँ प्रगति की गति से अधिक उसके स्थायित्व और प्रकृति के साथ सामंजस्य का महत्त्व है। बाल टोली का मानना है कि आधुनिक समय की अनियंत्रित विकासवादी दौड़ पारिस्थितिक तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँचा रही है। इसके विपरीत, कछुए की भाँति संतुलित, स्थिर और पर्यावरण के अनुकूल की गई प्रगति ही भविष्य को सुरक्षित रख सकती है।
*गाय की चिट्ठी: संवाद का अभिनव प्रयोग*
इस बार की रैली का सबसे मर्मस्पर्शी आकर्षण बाल टोली द्वारा वितरित ‘गाय की चिट्ठी’ रही। ‘पर्सपेक्टिव टेकिंग’ (नज़रिए को समझना) के इस अभिनव प्रयोग में गाय के दृष्टिकोण से मनुष्य और गौ-वंश के सदियों पुराने आत्मीय संबंधों को टटोलने की कोशिश की गई है। इस पत्र के माध्यम से बच्चों ने मूक पशु की व्यथा और समाज के प्रति उसके योगदान को “स्वयं की आवाज़” में प्रस्तुत किया, ताकि लोग इस आर्थिक और भावनात्मक जुड़ाव को गहराई से महसूस कर सकें।
*अभियान की निरंतरता और आगामी रूपरेखा*
मोगली पलटन की यह स्वायत्त बाल टोली समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने और प्रकृति आधारित आत्मनिर्भरता अपनाने की निरंतर प्रेरणा दे रही है। टोली के प्रतिनिधियों ने पुष्टि की है कि ‘कछुआ चाल ३.०’ के अंतर्गत यह जागरूकता यात्रा आगामी महीनों में भी प्रत्येक दूसरे रविवार को इसी संकल्प के साथ जारी रहेगी। जुलाई से प्रारंभ होकर मार्च (2027) तक चलने वाले इस नए चरण में कुल नौ रैलियाँ आयोजित की जाएंगी, जो पर्यावरण और सामाजिक विकास के नए प्रतिमान स्थापित करेंगी।

