घोड़छत्र नदी में मुरूम की खुदाई या खुली लूट,खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल, ठेकेदार की मनमानी से नदी का अस्तित्व खतरे में

नेशनल हाईवे-43 पर पठारी रेलवे फाटक और ग्राम सस्तरा के बीच घोड़छत्र नदी इन दिनों कथित मुरूम उत्खनन का शिकार हो रही है। नदी के दोनों किनारों पर जिस तरह से मुरूम की खुदाई की जा रही है, उसने न केवल प्राकृतिक तटों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था की पोल भी खोल दी है। सवाल सीधा है, अगर सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है तो विभाग जांच के नाम पर टालमटोल क्यों कर रहा है।

नदी के दोनों किनारों पर खुदाई के चलते तटों की प्राकृतिक संरचना बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। बरसात के मौसम में नदी पहले से ही उफान पर रहती है। ऐसे में तटों से मुरूम निकालकर उन्हें कमजोर करना भविष्य में कटाव और भूमि क्षरण का खतरा बढ़ा सकता है। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार द्वारा कथित रूप से लगातार खुदाई किए जाने की बात सामने आ रही है।

ठेकेदार की मनमानी या विभाग की मेहरबानी

सबसे बड़ा सवाल संबंधित ठेकेदार की भूमिका को लेकर है। यदि उसके पास मुरूम उत्खनन की वैध अनुमति है तो उसे यह बताना होगा कि अनुमति किस क्षेत्र और कितनी मात्रा के लिए दी गई है। क्या नदी के दोनों किनारों से मुरूम निकालने की अनुमति है। क्या पर्यावरणीय और खनन संबंधी शर्तों का पालन किया जा रहा है।इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।

वहीं यदि अनुमति नहीं है तो फिर इतनी संवेदनशील जगह पर खुदाई कैसे चल रही है। मशीनें और वाहन मौके तक पहुंच रहे हैं, मुरूम निकाला जा रहा है, लेकिन खनिज विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगना अपने आप में गंभीर सवाल है।

खनिज विभाग की जांच कराएंगे वाली कहानी कब खत्म होगी

मामले को लेकर जब खनिज निरीक्षक प्रभात पट्टा से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और कार्रवाई की जाएगी। अनुमति के संबंध में भी उन्होंने जांच का भरोसा दिया।

लेकिन सवाल यह है कि जांच आखिर कब होगी। जब तक जांच होगी, तब तक नदी के किनारों से कितना मुरूम निकल जाएगा। यदि मौके पर अवैध उत्खनन चल रहा है तो तत्काल कार्रवाई की बजाय केवल जांच का भरोसा देना क्या पर्याप्त है।

खनिज विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ शिकायत मिलने के बाद कागजी जांच करना नहीं, बल्कि खनिज संपदा के अवैध दोहन पर निगरानी रखना भी है। यदि विभाग को हाईवे किनारे चल रही गतिविधि दिखाई नहीं दे रही, तो विभाग की मैदानी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर से कैसे बची खुदाई

हैरानी की बात यह भी है कि यह क्षेत्र नेशनल हाईवे-43 से लगा हुआ है। इसी मार्ग से अधिकारी और जनप्रतिनिधि नियमित रूप से गुजरते हैं। इसके बावजूद नदी के किनारों की बदली तस्वीर किसी जिम्मेदार की नजर में नहीं आना कई सवाल खड़े करता है।

अब जरूरत सिर्फ बयान की नहीं, बल्कि मौके पर तत्काल जांच, उत्खनन की अनुमति की जांच, निकाली गई मुरूम की मात्रा का आकलन और नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है।

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