लाड़ली बहना पर MP सरकार का बढ़ता खर्च… क्या शिक्षा-स्वास्थ्य के बजट पर पड़ेगा असर?
मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है। महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना पर राज्य सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है। 2026-27 के बजट में योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
एक साल में करीब 28% बढ़ा बजट
2025-26 में लाड़ली बहना योजना के लिए 18,669 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जो 2026-27 में बढ़कर 23,882 करोड़ रुपये हो गया। यानी महज एक साल में योजना के बजट में करीब 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
मध्य प्रदेश का कुल बजट 2026-27 में करीब 4.38 लाख करोड़ रुपये है। इस लिहाज से लाड़ली बहना योजना पर होने वाला खर्च राज्य के कुल बजट का लगभग 5.4 फीसदी है।
स्वास्थ्य बजट के लगभग बराबर खर्च
आंकड़ों के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना के लिए रखा गया बजट राज्य के स्वास्थ्य बजट के करीब 99 फीसदी के बराबर है। वहीं, यह शिक्षा बजट के लगभग 42 फीसदी के बराबर बताया गया है।
यही आंकड़े अब एक बड़ी बहस को जन्म दे रहे हैं—महिला आर्थिक सशक्तीकरण के लिए जरूरी प्रत्यक्ष सहायता और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सरकारी निवेश के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?
लाभार्थियों की संख्या में भी बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में 5.5 लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इसके पीछे उम्र सीमा पार होना, ई-केवाईसी पूरी न होना या योजना का लाभ छोड़ देना जैसे कारण बताए गए हैं।
वहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में पिछले तीन वर्षों से नए पंजीयन बंद हैं।
लाड़ली बहना योजना को सरकार महिला आर्थिक सशक्तीकरण और परिवारों को आर्थिक सहारा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताती है। दूसरी ओर, विशेषज्ञ इसके दीर्घकालिक वित्तीय प्रभाव और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर संभावित असर को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि लाड़ली बहना पर कितना खर्च हो रहा है, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में इस बढ़ते खर्च का राज्य के विकास और वित्तीय प्राथमिकताओं पर क्या असर पड़ेगा?
पूरी खबर पढ़िए और बताइए—महिलाओं को आर्थिक सहायता जरूरी है, लेकिन क्या इसके साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट का संतुलन भी उतना ही जरूरी नहीं?