आदिवासी कलाकारों को लाभ पहुंचाने का शासन का आदेश ठंडे बस्ते में? बैगा समाज ने उठाए अब सवाल
अब जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने और उनकी कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जारी शासन के आदेश के पालन को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। बैगा समाज संघ मध्यप्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरी शंकर बैगा ने आरोप लगाया है कि शासन द्वारा जारी आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे बैगा समाज के परिवारों तक योजना का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
दरअसल इस मामले मे जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्थान, भोपाल द्वारा 5 मार्च 2026 को एक पत्र जारी कर प्रदेश के कई जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए गए थे। इस पत्र में जनजातीय नृत्य कला और लोक परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय कलाकारों को चिन्हित कर उन्हें इम्पैनल करने तथा उन्हें पारंपरिक परिधान, आभूषण और जनजातीय वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख किया गया था।
इस पत्र के अनुसार पहले चरण में संबंधित जिलों के जनजातीय विकासखंडों में कार्यरत कला मंडलियों के कलाकारों को सूचीबद्ध कर उन्हें सामग्री उपलब्ध कराने और इसका वित्तीय प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिए गए थे।
अब बैगा समाज संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरी शंकर बैगा का कहना है कि सरकार द्वारा जारी किए गए इस आदेश का कई जिलों में अभी तक सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना का लाभ वास्तविक जनजातीय कलाकारों और बैगा परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इस मामले मे उनका कहना है कि शासन स्तर पर कई आदेश जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो पाता, जिससे जनजातीय समाज के लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की है कि इस योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे।
जहा बैगा समाज के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि शासन के आदेशों का सही तरीके से पालन कराया जाए तो इससे जनजातीय कलाकारों की कला को नया मंच मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सकेगा।
वही अब इस मामले को लेकर जनजातीय समाज के लोगों में असंतोष देखा जा रहा है और वे प्रशासन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

