आईसीएसएसआर की प्रतिष्ठित फेलोशिप से सम्मानित हुईं डॉ. अलका मिश्रा।
नई दिल्ली स्थित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा डॉ. अलका मिश्रा पति श्री भूपेश द्विवेदी को प्रतिष्ठित पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप प्रदान की गई है। यह फेलोशिप पीएच.डी. उपरांत उच्च स्तरीय शोध कार्य के लिए देशभर के चुनिंदा शोधार्थियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा और कठोर चयन प्रक्रिया के बाद प्रदान की जाती है। इस उपलब्धि ने न केवल डॉ. मिश्रा के शैक्षणिक जीवन में एक नया आयाम जोड़ा है, बल्कि क्षेत्र के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
डॉ. अलका मिश्रा का शोध विषय “रिवोल्यूशन इन इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इट्स इंपैक्ट ऑन सोशल इंस्टीट्यूशन एंड कल्चर: ए कंपारेटिव स्टडी ऑफ रूरल एंड अर्बन सोसायटीज” वर्तमान समय की सामाजिक आवश्यकताओं और चुनौतियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह अध्ययन भारतीय समाज के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के सामाजिक संस्थाओं, सांस्कृतिक मूल्यों, पारिवारिक संरचनाओं तथा सामाजिक व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभावों का व्यापक एवं तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह शोध समाज को सूचना क्रांति के दूरगामी प्रभावों से अवगत कराने के साथ-साथ सामाजिक विकास और नीति निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देने वाला माना जा रहा है।
अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. अलका मिश्रा ने इसे ईश्वर की कृपा, पूर्वजों के आशीर्वाद तथा अपने परिवार के अटूट सहयोग का प्रतिफल बताया। उन्होंने कहा कि उनके स्वर्गीय पिता श्री कन्हैया मिश्र के आदर्श एवम् अतुलनीय स्नेह , माता श्रीमती पुष्पा मिश्र के संस्कार, पति श्री भूपेश द्विवेदी के संघर्षपूर्ण एवं अतुलनीय सहयोग, पुत्र आयुष द्विवेदी के त्याग तथा बहन अंजली मिश्रा, भाई अरुणेश मिश्रा एवं अनुग्रह मिश्रा के स्नेह, विश्वास और निरंतर प्रोत्साहन ने उन्हें हर कठिन परिस्थिति में आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान की।
डॉ. मिश्रा ने विशेष रूप से अपने गुरु डॉ. महेश शुक्ला, सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, टी.आर.एस. कॉलेज रीवा, के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि उनके मार्गदर्शन, प्रेरणा और आशीर्वाद का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि डॉ. शुक्ला जैसे महान गुरु का सान्निध्य और निर्देशन उनके शैक्षणिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे द्वारा समय-समय पर दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने शोध निर्देशक एवं विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नंदलाल मिश्रा के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और शैक्षणिक सहयोग को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। साथ ही डॉक्टर एस. येन.ओझा बित्ताधिकारी के प्रति भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।
डॉ. अलका मिश्रा ने अपने शोध कार्य को सफल बनाने में सहयोग देने वाले मित्र डॉक्टर राहुल यादव, डॉक्टर राहुल तिवारी एवं डॉक्टर नितेश उपाध्याय के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग, प्रोत्साहन और सकारात्मक सहभागिता ने शोध को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।
अपने संघर्षपूर्ण जीवन को स्मरण करते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर पाना भी अत्यंत कठिन प्रतीत होता था। परिस्थितियाँ विपरीत थीं, संसाधन सीमित थे, लेकिन आँखों में बड़े सपने और मन में अटूट विश्वास था। जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव, संघर्षों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उसी दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास के बल पर आज उन्हें पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप जैसी प्रतिष्ठित उपलब्धि प्राप्त हुई है।
डॉ. अलका मिश्रा की यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, समर्पण, शिक्षा और संकल्प की विजयगाथा है। उनकी यह उपलब्धि उन सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं। यह सफलता सिद्ध करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, संकल्प दृढ़ हो और परिवार व गुरुजनों का आशीर्वाद साथ हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

