अब शहरी क्षेत्रों में भी बिजली की भीषण कटौती
अधिकारी अपने सिस्टम फैलियर पर करते हैं मेंटेनेंस का बहाना
सीधी
पखवाड़े भर से अब सीधी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ सीधी जिला मुख्यालय और अन्य टाउनशिप, नगर परिषद एरिया में भी बिजली की भीषण कटौती 24 घंटे मनमानी तरीके से कभी भी दिन या रात को की जाने लगी है। इस कटौती से आम जन परेशान हैं।
हालात ये हैं कि इस भीषण गर्मी में यदि पांच मिनट बिजली गुल हो जाती है तो लोग पसीने से तर बतर हो जाते हैं। इसके बाद यदि घंटो बिजली गुल रहती है तो क्या हालात गुजरती होगी ये तो वही जानता है जिसकी बिजली गुल हो। लेकिन इससे नेताओं व विभाग के अधिकारियों को कोई लेना देना नहीं दिख रहा है। शिकायत के बाद भी कोई असर फिलहाल होना मुश्किल है।
बैसाख माह की भीषण गर्मी से आम जनता वैसे भी परेशान है। वहीं बिजली कटौती से लोगों की नींद भी हराम हो गई है।
ये हालात सीधी जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में दिख रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो सर्वाधिक कटौती शुरू हो गई है। वहीं शहर में भी कटौती का खेल कम नहीं दिख रहा है।
इस मामले में मेंटीनेंस के नाम पर विभाग बिजली कटौती होने की बात करता है लेकिन आधी रात बार-बार कौन सा मेंटीनेंस होता है ? जिसके बाद भी बिजली गुल हो जाती है। यह समझ से परे है।
चुनाव बाद 24 घंटे बिजली देने का वायदा भूल गई सरकार
चुनावों में तो भाजपा सरकार ये वायदा करती थी कि हम चौबीस घंटे बिजली देंगे लेकिन सीधी जिले में वो अपने वायदे को भूल गई है।
उधर कांग्रेस को शायद बिजली का मुद्दा नजर ही नहीं आ रहा है शायद इसलिए वो भी मौन है।
कांग्रेस के नेता तो जनता के इस मुद्दे पर एक बयान तक जारी करना मुनासिब नहीं समझते।
हालात ये हो गये हैं कि आए दिन बिजली की कटौती कई घंटो तक बनी रहती है। गत दिवस सीधी शहर में ही कई मोहल्लों में सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक बिजली गुल रही। उस दौरान लोग कैसे रात गुजारे होंगे इसकी परवाह विभाग के अधिकारियों को नहीं है।
वायदों को भूलकर मनमानी कर रही सरकार: भदौरिया
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष व कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह भदोरिया ने कहा कि भाजपा अपने वायदों को भूलकर जनता के साथ अनदेखी कर रही है। इस भीषण गर्मी में कटौती करना उचित नहीं है। उन्होने कहा कि भाजपा के घोषणा पत्र में यह कहा था कि हम 24 घंटे बिजली देंगे लेकिन आज वो वायदा सरकार भूल गई है।
भाजपा की सरकार में जनप्रतिनिधियों को अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने और झूठी वाहवाही का ढोल पीटने से टाइम ही नहीं है कि वो जनता से जुड़े मुद्दों पर सीरियस होकर ध्यान दे सकें।

