मुस्कान अभियान” पर सवाल: बच्ची की वापसी के नाम पर ₹50 हजार मांगने का आरोप, न्याय के लिए भटक रहा गरीब परिवार
सीधी जिले के सेमरिया थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकार के “मुस्कान अभियान” की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम बढऊरा निवासी एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका के अपहरण के बाद पीड़ित परिवार दर-दर भटकने को मजबूर है।
परिजनों के अनुसार, जब वे अपनी बेटी की शिकायत लेकर सेमरिया थाने पहुंचे, तो पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज करने के बजाय केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली। कुछ समय बाद परिवार को सूचना मिली कि उनकी बेटी गुजरात के किसी शहर में है। इसके बाद जब उन्होंने पुलिस से बच्ची को वापस लाने की गुहार लगाई, तो मामले की जांच कर रहे एएसआई भूपेंद्र बागड़ी पर गंभीर आरोप लगे।
पीड़ित माता-पिता का कहना है कि एएसआई ने उनसे साफ तौर पर ₹50 हजार की मांग की और कहा कि बिना पैसे के बच्ची को वापस लाना संभव नहीं है, क्योंकि वाहन और अन्य खर्च खुद उठाना होगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह मांग किसी पहाड़ से कम नहीं है।
हालांकि, थाना प्रभारी केदार परोहा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और पुलिस पूरी गंभीरता से बच्ची की तलाश में जुटी है। वहीं एएसआई भूपेंद्र बागड़ी ने भी पैसे मांगने के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि वे नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं।
परिवार ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। रविवार को दिए गए इस आवेदन के बाद अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या “मुस्कान अभियान” के तहत इस मासूम को जल्द न्याय मिलेगा या फिर सिस्टम की लापरवाही यूं ही जारी रहेगी।

