लाल किले से ‘शाही दीदार’,1911 दिल्ली दरबार में कोहिनूर जड़े ताज के साथ नजर आए किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी
भारत के इतिहास का एक भव्य लेकिन विवादित अध्याय 1911 के दिल्ली दरबार में देखने को मिला था जब King George V और Queen Mary ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला से भारतीय जनता को अपना ‘शाही दीदार’ कराया। इस दौरान दोनों शाही हस्तियां बेशकीमती रत्नों से जड़े ताज पहने नजर आईं, जिनमें दुनिया के सबसे चर्चित हीरों में से एक—कोहिनूर भी शामिल था।
जहा यह आयोजन Delhi Durbar 1911 का हिस्सा था, जिसे ब्रिटिश शासन की ताकत और भारत पर उनके आधिपत्य को दर्शाने के लिए आयोजित किया गया था। इसी दरबार में किंग जॉर्ज पंचम ने खुद को भारत का सम्राट घोषित किया और राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा भी की।
क्या है कोहिनूर हीरा ?
कोहिनूर हीरा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और विवादित हीरों में से एक है। इसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है और यह मूल रूप से भारत की धरती, खासकर गोलकुंडा की खानों से निकला था। कोहिनूर का अर्थ है “रोशनी का पर्वत”।
जाने अंग्रेजों के हाथ कैसे लगा?
सन 1849 में द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर कब्जा कर लिया। इसी दौरान नाबालिग महाराजा दलीप सिंह से जबरन संधि करवा कर कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन ले जाया गया। यह हीरा बाद में ब्रिटिश शाही खजाने का हिस्सा बन गया।
जाने ताज में कैसे जड़ा गया?
यह कोहिनूर को 19वीं सदी में ब्रिटेन ले जाकर फिर से तराशा गया और बाद में इसे ब्रिटिश शाही मुकुटों में जड़ा गया। 1911 के दिल्ली दरबार के समय, यह हीरा विशेष रूप से क्वीन मैरी के ताज में सजाया गया था, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य की शक्ति और वैभव का प्रदर्शन किया जा सके।
अब कहां है वह कोहिनूर?
जहा आज कोहिनूर हीरा टॉवर ऑफ लंदन में ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है। यह वहां सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा गया है, लेकिन भारत समेत कई देशों द्वारा इसकी वापसी की मांग लगातार उठती रही है।
सन 1911 का यह दृश्य सिर्फ एक शाही समारोह नहीं था, बल्कि वह पल भी था जब भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को ब्रिटिश सत्ता के प्रतीक के रूप में दुनिया के सामने प्रदर्शित किया गया।

