बिहार : भारत तिवारी एनकाउंटर मामला, एनकाउंटर य हत्या
भारत तिवारी के एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार एवं पुलिस पर नया विवाद खड़ा हो गया है,
पुलिस यह दावा कर रही है कि कार्रवाई कानून के अनुसार की गई, जबकि परिवार और कुछ लोगों ने इस एनकाउंटर पर गंभीर सवाल उठाए हैं,
क्या यह पुलिस की वैध कार्रवाई थी या फिर मामले में कुछ और सच छिपा है..?
दरअसल भारत तिवारी जो गांव के लोगों के जायज मुद्दे को उठाया था, गांव के लोगों कि समस्या शासन प्रशासन तक उठाया था,
जिस मामले पर सिस्टम के लोग काम नही कर रहे थे, बल्कि उसे पागल य सिरफिरा कहने लगे थे, जिसको लेकर वह बहुत परेशान हो गया था, और परेशान होकर वह अकेले लड़ाई लड़ने को तैयार हो गया, हुआ भी वही…. भारत तिवारी को गिरफ्तार करने पुलिस वाले उसके घर पहुंच गए, लेकिन गिरफ्तार नही कर पाए, फिर अगले दिन सुबह गिरफ्तार व एनकाउंटर करने पुलिस उसके गांव पहुंच गई, इस बार भारत तिवारी को अंदाजा हो गया था कि वह बचेगा नही और फिर पुलिस से बातचीत करते हुए पहले पुलिस के सामने अपनी पिस्टल फ़ेंकी और सरेंडर कर दिया, लेकिन पुलिस पहले से ही खार खाए बैठी हुई थी, और उसने भारत तिवारी को पकड़ कर नजदीक से गोली मारती है,
उसके परिवार जनों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस ने सरेंडर करने पर भी गोली चलाई वो भी बेहद नजदीक से, पुलिस ने भरत तिवारी के दोनों जांघो मे एक एक गोली मारी, एक गोली उसके गुप्तांग मे और दो गोली पेट मे कुल 5 गोली मारी गई, जिसके बाद उसे गंभीर हालत मे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरो ने उसे मृत घोषित कर दिया,
*भारत तिवारी का पुलिस द्वारा एनकाउंटर नही.. हत्या कि गई…*
घटना बिल्कुल स्पष्ट है कि पुलिस ने जो कार्यवाही कि वह तालिबानी सजा से कम नही क्योंकि भारत मे सजा देने का काम न्यायालय (Court) को है, पुलिस य सरकार को नही..
फिर क्यों बिहार पुलिस ने एक पढ़े लिखे युवक को जो गरीबो की आवाज़ बनकर समस्या को शासन प्रशासन तक उठा रहा था उसे अपराधी समझकर उसकी हत्या कर दी गई ..?
कई बड़े शवाल है जो बिहार पुलिस एवं सरकार पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहे है।

