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छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, नहीं काम आईं दलीलें

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले में आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, नहीं काम आईं दलीलें

जबलपुर : छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में 26 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई. इस मामले में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी, मेडिकल स्टोर संचालक, उसकी पत्नी व दो अन्य की जमानत याचिका खारिज कर दी है. एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दवा के रिएक्शन के संबंध में जानकारी होने के बावजूद भी डॉक्टर ने कमीशन लेकर बच्चों को दूषित कफ सिरप प्रिस्क्राइब किया. इतने गंभीर और संवेदनशील मामले में याचिकाकर्ताओं को जमानत का लाभ दिया जाता है, तो जनता का भरोसा बहुत कम हो जाएगा.

दवा लिखने वाले डॉक्टर ने लगाई थी जमानत याचिका

छिंडवाड़ा सिरप कांड मामले में गिरफतार डॉ. प्रवीण सोनी, उनकी पत्नी ज्योति सोनी सहित दो अन्य की ओर से जमानत के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया गया था. आवेदन में कहा गया था कि आवेदक डॉ. प्रवीण सोनी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर परासिया, जिला छिंदवाड़ा में चाइल्ड स्पेशलिस्ट के तौर पर पोस्टेड हैं. वह विगत 5 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं. वह कोल्डरिफ सिरप नाम की दवा निर्माता व निर्देशक नहीं हैं. कफ सिरप को बनाने में उनका कोई रोल नहीं है और उन्हें इस बात की जानकारी नही थी कि उसमें कोई मिलावट की गई है.

जमानत के लिए दिए गए ये तर्क

आवेदक 20 साल से यह दवा लिख रहा है, दूसरों की गलतियों की वजह से उस पर इस जुर्म के लिए केस नहीं चलाया जा सकता. कफ सिरप वैलिड लाइसेंस मिलने के बाद बनाया गया था. ड्रग्स रूल्स, 1945 के अनुसार दवा बनाने में कुछ फॉर्मैलिटीज जरूरी हैं और उनका पालन किया गया है. कफ सिरप श्रीसन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने बनाया और बेचा था. आवेदक ने जिस समय दवा लिखी थी उस समय उसपर कोई रोक नहीं थी. दवा पर पहली बार 4 अक्टूबर 2025 को रोक लगाई गई थी. बिना जांच के प्रैक्टिशनर डॉक्टर के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किया जाना चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

सरकार की ओर से बताया गया कि कम्युनिटी हेल्थ सेंटर परासिया के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकित सेहलम की शिकायत पर पुलिस ने धारा 105, 276 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 27(।) के तहत प्रकरण दर्ज कराया था. आवेदक डॉ. प्रवीण सोनी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर परासिया डिस्ट्रिक्ट छिंदवाड़ा में चाइल्ड स्पेशलिस्ट के तौर पर पदस्थ थे, जिन्होंने बच्चों को कफ सिरप की एक खास डोज दी थी, जिसकी वजह से उन बच्चों की किडनी में कुछ रिएक्शन हुआ, जिससे किडनी फेल हो गई थी.

इसके बाद कुछ बच्चों की मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल नागपुर (महाराष्ट्र) रेफर किए जाने के बाद मौत हो गई. इस दवा को सह आरोपी ने बेचा था, जो मौजूदा एप्लीकेंट के मालिकाना हक वाले मेडिकल स्टोर में काम करता था. इस मामले में डॉक्टर की पत्नी को भी सह आरोपी बनाया गया.

खतरनाक था सिरप फिर भी किया प्रिस्क्राइब

आवेदक ने लगभग 3-4 साल के बच्चों को कोल्ड रिफ कफ सिरप दिया था. सरकारी लैबोरेटरी और ड्रग डिपार्टमेंट की रिपोर्ट से यह साफ पता चलता है कि उस कफ सिरप में 46.28 प्रतिशत डायथिलीन ग्लाइकॉल था, जबकि इसकी फार्माकोपिया लिमिट 0.1 प्रतिशत है/ डायथिलीन ग्लाइकॉल एक जाना-माना नेफ्रोटॉक्सिक है, जो बच्चों के लिए खास तौर पर जानलेवा है. बच्चों की मौत का कारण एक्यूट किडनी फेलियर व एक्यूट ट्यूबलर नेक्रोसिस था.

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन द्वारा 18.12.2023 को जारी सर्कुलर के अनुसार, फिक्स्ड डोज कंपाउंड चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित थी. इसके बावजूद भी डॉक्टर ने चार साल से कम बच्चों को कफ सिरप दिया.

Manoj Shukla

Manoj Shukla

मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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