कागजों में विकास, खातों में खेल, आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आना यह दिखाता है कि कागजों पर चल रही योजनाओं में कैसे शासकीय धन को रास्ते से भटकाया जा रहा है। मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला प्रबंधन इकाई उमरिया में वित्तीय अनियमितताओं ने प्रशासन को हिला कर रख दिया है। जांच के बाद जिला प्रबंधक (कृषि) एवं प्रभारी जिला प्रबंधक (वित्त) महेंद्र कुमार बारसकर के विरुद्ध कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
जानकारी के अनुसार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण व्यय और मानदेय के नाम पर पहले स्वीकृत राशि का भुगतान किया गया। इसके बाद उसी स्वीकृति आदेश का सहारा लेकर फिर से भुगतान कर दिया गया। इस दोहरे भुगतान से सरकारी खजाने को 1,43,440 रुपये की सीधी चपत लगी। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि बिना किसी सक्षम स्वीकृति के 1,36,683 रुपये का भुगतान कर दिया गया। इस तरह कुल 2,80,123 रुपये के गबन का मामला उजागर हुआ।
यह पूरा खेल तब सामने आया जब जिला मिशन प्रबंधन इकाई का अंतरिक निरीक्षण किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया। जांच दल ने पाया कि भुगतान की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर फर्जी तरीके अपनाए गए। कुछ मामलों में एक ही बिल के आधार पर दो बार पैसा निकाला गया, तो कुछ भुगतान बिना किसी वैध आदेश के कर दिए गए।
मामले को हल्के में न लेते हुए विभाग ने आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और जवाब देने का अवसर दिया। लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उमरिया ने सख्त रुख अपनाते हुए एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
कोतवाली थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार आरोपी द्वारा फर्जी बिल और वाउचर के आधार पर शासकीय राशि निकाले जाने के प्रमाण मिले हैं। इसी आधार पर अपराध क्रमांक 49/26 धारा 316(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। फिलहाल गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन मामले की गहन जांच जारी है।
ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही आजीविका मिशन जैसी योजना में सामने आया यह भ्रष्टाचार न सिर्फ सरकारी तंत्र की कमजोरी उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक कागजों में ईमानदारी और हकीकत में लूट का यह खेल चलता रहेगा। अब देखना यह है कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।
