जर्जर भवन, गिरती छतें और बाहर खड़ी छात्राएं, 5000 बेटियों की पढ़ाई खतरे में, कन्या महाविद्यालय सीधी में NSUI का अल्टीमेटम
सीधी कन्या महाविद्यालय सीधी में पढ़ने वाली लगभग 5000 छात्राओं की सुरक्षा और भविष्य आज गंभीर खतरे में है। कॉलेज का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है, हालात ऐसे हैं कि नियमित कक्षाएं लगें तो सभी छात्राओं के बैठने तक की जगह नहीं बचती, कई छात्राओं को कक्षाओं के दौरान बाहर खड़े होकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ता है।
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में कॉलेज की छत से सीलिंग गिर गई, गनीमत रही कि उस वक्त कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई और छात्राएं बाल-बाल बच गईं। यह घटना कॉलेज प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है।
NSUI के प्रदेश सचिव विक्रांत सिंह ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सिर्फ भवन ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने बताया कि कई शिक्षक केवल ‘सार्थक एप’ के जरिए अटेंडेंस लगाने आते हैं और बिना कक्षा लिए वापस चले जाते हैं। इतना ही नहीं, कई विभाग और प्रयोगशालाएं महीनों से बंद पड़ी हैं, जिनके ताले तक नहीं खुलते।
NSUI और छात्राओं का आरोप है कि इन समस्याओं की शिकायत कई बार प्राचार्य और संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन उनकी बातों को लगातार अनसुना किया गया। परेशान छात्राओं ने यह मामला एनएसयूआई के प्रदेश सचिव के संज्ञान में लाया, जिसके बाद सोमवार दोपहर करीब 3 बजे प्राचार्य जेपी नामदेव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि जर्जर भवन की तकनीकी जांच कराकर तत्काल मरम्मत कराई जाए, सभी विभाग और प्रयोगशालाएं नियमित रूप से खोली जाएं, शिक्षकों की भौतिक उपस्थिति की निगरानी हो और अनुपस्थित पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही छात्राओं की शिकायतों के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी समिति गठित की जाए तथा महिला शिक्षकों और छात्राओं के टॉयलेट की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।
वहीं इस पूरे मामले पर प्राचार्य जेपी नामदेव ने कहा कि उन्हें ज्ञापन प्राप्त हो गया है और उन्होंने छात्राओं को शीघ्र उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
