डॉक्टर नदारद, सिस्टम बेदम, सेमरिया अस्पताल में इलाज के अभाव में मरीज की मौत, स्कूटी पर ले जाया गया शव
एमपी के सीधी जिले के सेमरिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक बेहद दर्दनाक और शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यहां 50 वर्षीय रामसजीवन गुप्ता इलाज के अभाव में तड़पते रहे और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उस समय न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही जिम्मेदार स्टाफ, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका।
बताया यह भी जा रहा है कि बुधवार रात करीब 11 बजे रामसजीवन गुप्ता की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें तत्काल सेमरिया अस्पताल लाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को निराशा हाथ लगी। बेटा-बेटी मदद के लिए अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे, गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। इलाज के इंतजार में मरीज तड़पता रहा और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद स्थिति और भी अमानवीय हो गई। परिजनों को न तो एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई और न ही शव वाहन। मजबूरी में परिवार को अपने ही सदस्य के शव को स्कूटी पर बैठाकर घर ले जाना पड़ा। यह दृश्य पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही को उजागर करता है।
वही स्थानीय निवासी प्रभात वर्मा ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। अक्सर अस्पताल में डॉक्टर ड्यूटी से गायब रहते हैं और मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता, जिससे कई बार जान तक चली जाती है।
जहा मृतक के बेटे संजीव गुप्ता ने आरोप लगाया कि घटना के समय डॉक्टर संजय पटेल की ड्यूटी थी, लेकिन वे अस्पताल में मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध होते, तो शायद उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन ने न तो इलाज की व्यवस्था की और न ही शव ले जाने के लिए कोई सुविधा दी।
वहीं अब डॉक्टर संजय पटेल ने सफाई देते हुए कहा कि वे खाना खाने के लिए अपने कमरे में गए थे और उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं दी गई। फिलहाल यह घटना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

