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चार साल आंख बंद, आठ साल कान बंद,उमरिया जिला अस्पताल में सरकार बेखबर

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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चार साल आंख बंद, आठ साल कान बंद,उमरिया जिला अस्पताल में सरकार बेखबर

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिला अस्पताल अब इलाज का नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि मरीज बीमारी से कम और व्यवस्था की मार से ज्यादा परेशान हैं। आंख, नाक, कान और गले जैसे सामान्य इलाज के लिए भी लोगों को सालों से इंतजार करना पड़ रहा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता के साथ किया गया अन्याय है।

जिला अस्पताल में आंख के डॉक्टर को गए चार साल हो चुके हैं। ईएनटी विशेषज्ञ आठ साल से नदारद हैं। रेडियोलॉजिस्ट भी दो साल से नहीं है। यानी जांच से लेकर इलाज तक सब अधूरा। मजबूरी में मरीजों को बाहर रेफर किया जाता है। गरीब परिवार इलाज के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि जब जिला अस्पताल में इलाज नहीं होगा तो जनता जाए कहां।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी वी एस चंदेल खुद मानते हैं कि डॉक्टरों की कमी की जानकारी प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को दी जा चुकी है। मतलब सरकार को सब पता है। फिर भी न डॉक्टर आए, न व्यवस्था सुधरी। साफ है कि यह अनदेखी नहीं, बल्कि संवेदनहीनता है।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष इंजीनियर विजय कोल ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। उनका कहना है कि 20 से 25 साल सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा सरकार उमरिया को डॉक्टर नहीं दे पाई। जिला अस्पताल इलाज का केंद्र बनने के बजाय रेफर सेंटर बन चुका है। कांग्रेस ने साफ कहा है कि अगर जल्द डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई तो पूरे जिले में आंदोलन होगा।

भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष अग्रवाल का जवाब और भी चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि डॉक्टरों की कमी पूरे प्रदेश की समस्या है और एक साल में पांच हजार डॉक्टर निकल आएंगे। सवाल यह है कि तब तक उमरिया की जनता क्या करे। क्या मरीज एक साल इंतजार करें या बिना इलाज के जीना सीखें।

सबसे बड़ा कटघरा दोनों विधायकों का है। मानपुर से मीना सिंह और बांधवगढ़ से शिवनारायण सिंह, दोनों भाजपा के विधायक हैं। दोनों सत्ता पक्ष में हैं। फिर भी जिला अस्पताल में सालों से डॉक्टर नहीं हैं। क्या विधायकों की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित है। क्या भोपाल में उमरिया की आवाज कमजोर पड़ जाती है।

प्रदेश सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन उमरिया जिला अस्पताल उन दावों की पोल खोल रहा है। आंखों के मरीज चार साल से इंतजार कर रहे हैं। ईएनटी के मरीज आठ साल से भटक रहे हैं। जांच के बिना इलाज हो रहा है। यह आंकड़े नहीं, जिंदा लोगों की तकलीफ है।

अब जनता सवाल पूछ रही है और जवाब मांग रही है। सरकार और दोनों विधायकों को साफ बताना होगा कि उमरिया कब तक अनदेखा रहेगा। वरना यह गुस्सा सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा, इसका असर राजनीति पर भी साफ दिखाई देगा।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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