गलत कुर्की मामले में हाई कोर्ट नाराज, उमरिया कलेक्टर और तहसीलदार तलब
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले में न्यायालय के आदेश के पालन में की गई बड़ी चूक अब प्रशासन पर भारी पड़ती दिख रही है। मानपुर तहसील के ग्राम चंदवार से जुड़े एक भरण-पोषण मामले में हाई कोर्ट ने कलेक्टर उमरिया और तहसीलदार मानपुर की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आदेश की अवहेलना और गलत कुर्की किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती।

मामला अनीता लोनी पति राजमन लोनी से जुड़ा है। वर्ष 2015 में पारिवारिक विवाद के बाद अनीता अपने पति से अलग होकर मायके ग्राम रोहनिया, जिला मैहर में रहने लगी। लंबे समय तक सुलह के प्रयास विफल रहने पर अनीता ने फैमिली कोर्ट में अपने और दो बच्चों के भरण-पोषण के लिए आवेदन किया। न्यायालय ने राजमन लोनी को तीन हजार रुपये प्रति माह देने का आदेश दिया, लेकिन आरोप है कि आज तक एक भी किश्त अदा नहीं की गई।
इसके बाद अनीता ने दोबारा न्यायालय की शरण ली। कोर्ट ने राजमन लोनी की चल-अचल संपत्ति कुर्क कर भरण-पोषण की राशि वसूलने के निर्देश दिए और इस आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कलेक्टर उमरिया और तहसीलदार मानपुर को सौंपी गई। साथ ही उन्हें स्वयं न्यायालय में उपस्थित होने को कहा गया।
यहां सबसे गंभीर चूक सामने आई। हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता पुरुषोत्तम दास जायसवाल के अनुसार, राजमन लोनी के नाम कोई संपत्ति नहीं होने की स्थिति में प्रशासन ने उसके भाइयों की संपत्ति को कुर्क कर सरपंच की सुपुर्दगी में दे दिया। यह कार्रवाई न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि निर्दोष लोगों की संपत्ति पर सीधी चोट भी है।
इतना ही नहीं, न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश के बावजूद कलेक्टर और तहसीलदार पेश नहीं हुए। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों अधिकारियों को अंतिम अवसर देते हुए 23 जनवरी 2026 को स्वयं उपस्थित होने का आदेश जारी किया है।
अब सबकी नजर 23 जनवरी पर टिकी है। अगर अधिकारी पेश नहीं होते, तो अदालत सख्त कदम उठाते हुए वारंट जारी कर सकती है। यह मामला न सिर्फ एक परिवार के अधिकारों का है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा भी बन गया है।
