“जागरूकता रथ बना ‘फोटो रथ’ ? किसानों तक नहीं पहुंच पा रही योजनाओं की असली जानकारी!”
सीधी: सिंहावल में कृषि विभाग के अभियान पर उठे गंभीर सवाल
किसानों को आधुनिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी संरक्षण और नई कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से जिला कृषि विभाग द्वारा जागरूकता रथ रवाना किया गया।
सरकार की मंशा थी कि यह अभियान गांव-गांव पहुंचकर किसानों को नई तकनीकों से जोड़े और खेती को अधिक लाभकारी बनाए।
लेकिन सिंहावल क्षेत्र में इस अभियान की जमीनी हकीकत कुछ अलग ही तस्वीर पेश कर रही है।
“कुछ मिनट प्रचार… फिर फोटो सेशन और रथ रवाना!”
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जागरूकता रथ कृषि विभाग कार्यालय के सामने पहुंचा, राह चलते लोगों को रोककर फोटो खिंचवाई गई, कुछ देर लाउडस्पीकर से प्रचार किया गया और फिर रथ आगे बढ़ा दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि किसानों के बीच बैठकर संवाद करने, उनकी समस्याएं सुनने और खेती से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी देने की गंभीर कोशिश नजर नहीं आई।
किसानों का बड़ा सवाल
क्या करोड़ों रुपये के कृषि जागरूकता अभियान सिर्फ कागज़ी रिपोर्ट और फोटो तक सीमित होकर रह गए हैं?
क्या खेतों तक पहुंचकर किसानों को प्रशिक्षित करना विभाग की प्राथमिकता नहीं है?
आखिर गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को मिट्टी परीक्षण, जैविक खेती, सिंचाई प्रबंधन और उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
“खेती सुधारने की बात…
लेकिन जमीन पर सिर्फ औपचारिकता!”
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि आज भी अधिकांश किसानों को
सही मात्रा में उर्वरक उपयोग
आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग
फसल सुरक्षा उपाय
मिट्टी संरक्षण तकनीक
कम लागत में अधिक उत्पादन
जैसी जरूरी जानकारियां समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
किसानों का मानना है कि यदि विभाग वास्तव में किसानों के हित में काम करना चाहता है, तो सिर्फ प्रचार वाहन चलाने से नहीं बल्कि गांवों में बैठकर सीधा संवाद करना होगा।
“किसानों को दिखावा नहीं, व्यवहारिक जानकारी चाहिए”
विशेषज्ञों का भी मानना है कि कृषि जागरूकता अभियान तभी सफल माना जाएगा जब किसान नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
सिर्फ बैनर, माइक और फोटो से खेती में बदलाव नहीं आएगा।
रिपोर्टर राजबहोर केवट
सीधी – सिंहावल

