“दरवाजे नहीं लगे तो यह बेहद शर्मनाक” — कलेक्टर विकास मिश्रा के बयान के बीच जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था उजागर, ICU के पास बने 6 शौचालय बिना दरवाजों के
सीधी जिले के जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। अस्पताल के आईसीयू वार्ड के पास और उसके नीचे बने 6 शौचालयों में आज तक दरवाजे नहीं लगाए गए हैं, जिससे मरीजों और उनके साथ आने वाले अटेंडरों को भारी परेशानियों और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन खुले शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं, वहीं पानी की समस्या और गंदगी ने हालात को और बदतर बना दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शौचालयों में न तो दरवाजे लगे हैं और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। लगातार बदबू और गंदगी से मरीजों को संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।
मरीज के अटेंडर पवन शुक्ला ने बताया कि वह अपने भाई को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां की शौचालय व्यवस्था देखकर बेहद शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने कहा कि “शौचालय इतने खराब हाल में हैं कि उनका उपयोग करने में भी संकोच होता है। दरवाजे न होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है।”
सोमवार शाम करीब 5 बजे एक मरीज के अटेंडर द्वारा सोशल मीडिया पर अस्पताल की अव्यवस्थाओं का वीडियो शेयर किया गया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने जिला अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।
वायु शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने कहा कि जिला अस्पताल की हालत बद से बदतर हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर अस्पताल का निरीक्षण तो करते हैं, लेकिन व्यवस्थाओं में कोई सुधार दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि “कलेक्टर मरीजों और डॉक्टरों से बात करके चले जाते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता।”
वहीं इस पूरे मामले पर सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा ने कहा कि रोगी कल्याण समिति की बैठक में शौचालयों के दरवाजे नए सिरे से लगवाने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि “अगर अब तक दरवाजे नहीं लगे हैं तो यह बेहद शर्मनाक है। इसकी जांच कराई जाएगी। अस्पताल के शौचालयों में दरवाजे न होना बिल्कुल उचित नहीं है।”

