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उमरिया में पत्रकारों ने प्रशासनिक रवैये के खिलाफ उठाई आवाज

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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उमरिया में पत्रकारों ने प्रशासनिक रवैये के खिलाफ उठाई आवाज

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले में प्रशासन और मीडिया के बीच बढ़ती दूरी अब खुलकर सामने आ गई है। पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि जिला मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने कर्मचारियों को मौखिक रूप से निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या पत्रकार को बाइट न दें। साथ ही यह भी कहा गया है कि कार्यालयों में पत्रकारों को बैठने तक के लिए न कहा जाए।

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प्रेस क्लब के महासचिव हीरा सिंह ने बताया कि ये आदेश भले ही लिखित रूप में न हों, लेकिन व्यवहार में पूरी सख्ती के साथ लागू किए जा रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि जब अधिकारी संवाद से बचेंगे, तो जनता तक सही और संतुलित जानकारी कैसे पहुंचेगी। इस रवैये को पत्रकारों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है।

इन्हीं हालातों के चलते उमरिया जिले के पत्रकारों ने 16 जनवरी 2026 को प्रस्तावित प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (पीआईबी) की मीडिया वार्ता का सामूहिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया। पत्रकारों का स्पष्ट कहना है कि जब स्थानीय स्तर पर प्रशासन संवाद के दरवाजे बंद कर रहा है, तब औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होना केवल प्रतीकात्मक रह जाता है।

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गौरतलब है कि पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार, भोपाल द्वारा 15 जनवरी 2026 को मीडिया कवरेज हेतु आमंत्रण जारी किया गया था। आमंत्रण के अनुसार प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, भोपाल द्वारा विकसित भारत–जी राम जी 2025 अधिनियम पर मीडिया वार्तालाप कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। यह कार्यक्रम 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को प्रातः 11 बजे होटल स्वर्णिम, उमरिया में प्रस्तावित था।

पत्रकारों का कहना है कि एक तरफ सरकार मीडिया से संवाद और पारदर्शिता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा पत्रकारों से दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं। यह विरोधाभास न केवल सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासन की मंशा पर भी संदेह पैदा करता है।

प्रेस क्लब पदाधिकारियों ने साफ किया है कि यह बहिष्कार किसी एक कार्यक्रम या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो सवालों से बचने के लिए सूचना के रास्ते बंद करना चाहती है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अपना रवैया नहीं बदला और संवाद की प्रक्रिया बहाल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

यह पूरा घटनाक्रम उमरिया में प्रशासन और मीडिया के रिश्तों में आई गंभीर खटास को उजागर करता है, जिसका असर जिले की सूचना व्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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