खेरवा टोला में बाघ का कहर, महिला की मौत के बाद भड़का गांव, रेंजर समेत वनकर्मी घायल, बाघ की मौत
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे खेरवा टोला गांव में बाघ के हमले के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। बाघ के हमले में एक महिला की मौत और चार ग्रामीणों के घायल होने के बाद गुस्साए ग्रामीणों का आक्रोश वन विभाग पर फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन अमले पर हमला कर दिया, जिसमें रेंजर समेत तीन वनकर्मी घायल हो गए।


घायल वन कर्मचारियों में रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव, वन विभाग के ड्राइवर जीतेंद्र द्विवेदी और सिपाही पंकज चंदेल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि हमले में रेंजर के सिर में गंभीर चोट आई है। सभी घायलों को मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं बाघ के हमले में घायल ग्रामीणों का भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।

जानकारी के अनुसार बाघ गांव के एक घर में घुस गया था, जहां उसने महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। महिला को बचाने पहुंचे ग्रामीणों पर भी बाघ ने हमला कर दिया, जिससे चार लोग घायल हो गए। घटना के बाद बाघ काफी देर तक घर के अंदर ही मौजूद रहा, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम गांव पहुंची, लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने वन अमले को घेर लिया और हमला कर दिया। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस बल को भी मौके पर तैनात करना पड़ा। फिलहाल गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल के आसपास जमा हैं।

इस घटना को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने मृत महिला के परिजनों को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता देने और सभी घायलों का निशुल्क इलाज कराने की घोषणा की है।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम लगातार बाघ को पकड़ने की कोशिश में जुटी हुई है। वहीं ग्रामीणों में भय और नाराजगी दोनों साफ दिखाई दे रही है।
ट्रैंकुलाइज के बाद बाघ की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन पर उठे सवाल
ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचे टाइगर को सुरक्षित तरीके से जंगल में वापस भेजने के लिए वन विभाग की टीम ने बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ था, जिसके बाद विशेषज्ञों और वन अमले की मौजूदगी में टाइगर को ट्रैंकुलाइज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद टाइगर को बेहोश कर काबू में लिया गया।
रेस्क्यू टीम लगातार टाइगर की निगरानी करती रही। शुरुआती समय में उसकी हालत सामान्य बताई जा रही थी, लेकिन कुछ देर बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। मौके पर मौजूद अधिकारियों और चिकित्सकीय टीम ने उसे बचाने के प्रयास किए, मगर तमाम कोशिशों के बावजूद टाइगर ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया और पूरे मामले को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, ट्रैंकुलाइज के दौरान दवा की अधिक मात्रा दिए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वन विभाग की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।


