“खेत तैयार, किसान तैयार, लेकिन यूरिया फरार! बुवाई से पहले सीधी में खाद संकट”
सीधी जिले में एक बार फिर खाद संकट किसानों की चिंता बढ़ाने लगा है। अभी खरीफ सीजन की बुवाई पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन यूरिया खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं। खेतों की जुताई और धान रोपण की तैयारी जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर खाद के गोदामों और वितरण केंद्रों पर किसानों को निराशा हाथ लग रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन लगातार यह दावा करता रहा कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं होगी, तब बुवाई से पहले ही यूरिया का स्टॉक आखिर कहां गायब हो गया? किसानों का कहना है कि यदि अभी यह स्थिति है तो 10-15 दिन बाद, जब धान की फसल में खाद की वास्तविक आवश्यकता शुरू होगी, तब हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा ने पूर्व में कहा था कि जिले में किसी भी प्रकार की खाद की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। लेकिन वर्तमान स्थिति किसानों को उस आश्वासन की याद दिला रही है। किसान व्यंग्य में कह रहे हैं कि शायद खाद कागजों में पर्याप्त होगी, लेकिन खेतों तक पहुंचने से पहले ही उसका रास्ता बदल जाता है।
यह पहली बार नहीं है जब सीधी जिले में खाद को लेकर संकट की स्थिति बनी हो। पूर्व वर्षों में भी किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा था और कई बार पुलिस की मौजूदगी में वितरण तक कराना पड़ा था। स्थानीय समाचार रिपोर्टों में भी पहले खाद की कमी और वितरण केंद्रों पर भारी भीड़ की स्थिति सामने आ चुकी है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन को अभी से अतिरिक्त स्टॉक की व्यवस्था करनी चाहिए, अन्यथा बुवाई प्रभावित होगी और इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। कृषि प्रधान जिले में खाद का संकट केवल किसानों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे कृषि तंत्र के लिए चेतावनी है।
नोट: खबर की पुष्टि के लिए अपने क्षेत्र के विपणन अधिकारी से संपर्क करें। जिले में उपलब्ध खाद स्टॉक की जानकारी आप मध्यप्रदेश शासन की ई-विकास प्रणाली पर भी देख सकते हैं।
https://evikas.mpkrishi.mp.gov.in/FarmerProfile/FarmerProfileManagement
साथ ही राज्य की उर्वरक आपूर्ति एवं उपलब्धता संबंधी जानकारी ई-विकास प्रणाली और मार्कफेड के रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहती है।

