नए कलेक्टर की जमीनी सक्रियता और कार्यशैली जिले के लिए आशा की किरण
नए कलेक्टर के आते ही सब कुछ ऐसे बदला, मानो कुछ जादू हो
Madhya Pradesh state head Raju Gupta
सीधी: कोई भी संस्था हो, कोई ऑफिस हो, कोई परिवार हो, या कोई राजनीतिक दल, हर जगह उसका विकास और उसकी प्रगति उसके मुखिया पर ही आधारित होती है।
यदि मुखिया की सोच सकारात्मक है तो बाकी लोग उसे फॉलो करते हैं और यदि मुखिया की सोच नकारात्मक है तो बाकी लोग उसे ही फॉलो करते हैं, या जो कुछ इमानदार लोग होते हैं वो अपने आप को जरा निष्क्रिय कर लेते हैं।
अभी कुछ दिन पहले की ही तो बात है जब तक पूर्व कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी थे तब तक सीधी जिले के पूरे प्रशासनिक तंत्र में मानो प्राण वायु का यथा अभाव था, परंतु जैसे ही नवागत कलेक्टर विकास मिश्रा ने जिले की कमान संभाली है तब से हाल फिलहाल सब कुछ ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे जिला प्रशासन के पूरे तंत्र को पंख लग गए हैं।
लगातार फील्ड में सक्रियता
सीधी यानी एक ऐसा ज़िला, जहाँ आज भी स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएँ सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, लेकिन अब नए कलेक्टर विकास मिश्रा के आगमन के साथ प्रशासनिक सक्रियता साफ़ दिखाई देने लगी है।
नवागत कलेक्टर के पदभार संभालते ही ताबड़तोड़ दौरे, लगातार बैठकें और ज़मीनी निरीक्षण, यह संकेत देते हैं, कि इस बार चीज़ों को कागज़ों से निकालकर ज़मीन पर उतारने का प्रयास हो रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार सीधे निशाने पर
जिला चिकित्सालय और चुरहट अस्पताल का निरीक्षण, डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति, दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता, मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और आयुष्मान योजना के सही क्रियान्वयन को लेकर दिए गए कड़े निर्देश, यह संकेत देते हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा। साथ ही मरीजों से सीधे संवाद करना और मौके पर ही सुधार के निर्देश देना, एक जिम्मेदार और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
शिक्षा माफिया पर नकेल कसने की कोशिश
शिक्षा के क्षेत्र में भी निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाते हुए अभिभावकों को राहत देना, नवोदय विद्यालय का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से फीडबैक लेना, और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कोशिश, यह स्पष्ट करता है कि शिक्षा व्यवस्था को भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
जनसुनवाई में उमडने लगी भीड़
जनसुनवाई को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में पहल करते हुए अब जनसुनवाई में आने वाले आवेदनों के निराकरण उपरांत आवेदकों को फोन करके सीधे तौर पर उन्हें सूचित किया जाएगा। नवागत कलेक्टर द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल लगाकर लोगों से सीधे संवाद करना, पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य शिविरों की शुरुआत करना और लापरवाही पर तत्काल नोटिस व कार्रवाई की चेतावनी देना, ये सभी कदम एक ऐसी कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं, जो जवाबदेही और परिणाम पर आधारित है।
खास बात यह है कि यह सक्रियता केवल औपचारिक नहीं दिखती, बल्कि प्राथमिक मुद्दों, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सीधा फोकस करती नजर आती है, जो कि सीधी की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
हालाँकि, अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगा कि हालात पूरी तरह बदल जाएंगे, लेकिन इतना जरूर है कि लंबे समय बाद सीधी में एक उम्मीद की किरण जगी है।
अगर यही सक्रियता और प्राथमिकता बनी रही, तो शायद सीधी के सबसे बड़े मुद्दे, स्वास्थ्य और शिक्षा, वास्तव में सुधार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

