नियम को ठेंगा दिखा रहे क्रेशर एवं मार्बल खदान संचालक
सैंपलिंग के नाम पर हो रहा है मार्बल व ग्रेनाइड पत्थरों का परिवहन
संजय सिंह मझौली
तहसील मझौली अंतर्गत ग्राम करमाई एवं खड़ौरा में मार्बल एवं ग्रेनाइड खदान संचालित हैं वहीं क्रेशर मशीन भी स्थापित है जिससे गिट्टी एवं सिल्लियां उत्पादन एवं परिवहन का कारोबार होता है वहीं मार्बल ग्रेनाइड पत्थर भी सिल्लियां बनाकर परिवहन हो रहे हैं जिसमे नियम कायदे को ठेंगा दिखाते हुए मनमानी तरीके से कारोबार किया जा रहा है।
सुरक्षा के नहीं है इंतजाम
किसी भी खदान स्वीकृत की मुख्य सर्त है जिसमें मानव एवं पशुओं की सुरक्षा, पर्यावरण सुरक्षा, सड़क सुरक्षा एवं परिवहन की प्रक्रिया कानूनी तौर पर होनी चाहिए लेकिन संचालित मार्बल व ग्रेनाइड खदान एवं क्रेशर खदानों में इनका पालन नहीं किया जा रहा है वहीं सैंपलिंग के नाम पर मार्बल की बडी-बडी सिल्लियां ट्रक एवं हाईवा से बाहर भेजे जा रहे हैं जो एक तरफ ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं वहीं राजस्व की भी हानि हो रही है क्योंकि कागजों में खदानों का संचालन मात्र सैंपल उत्पादन के लिए ही दिखाया जाता है जबकि कारोबार पूरा चलता है।
जानकारों के मुताबिक जिस क्षेत्र में खदान संचालित है वहां पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से अधिग्रहित जमीन के बदले उतने ही रकवा में अन्य जमीन में पौधारोपण कर पर्यावरण को संतुलित किया जाए और कुल मुनाफे से 20% उस ग्राम के विकास में राशि खर्च की जाए। वहीं खदान संचालन के पूर्व सुरक्षा की दृष्टि से तार वाडी लगाई जाए। इन शर्तों का पालन न करते हुए कारोबार जारी रहना पूरे तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
संयुक्त टीम द्वारा की जा चुकी है कार्यवाही
बताते चलें कि पिछले पखवाड़ा दिखावे के नाम पर ग्रेनाइड पत्थर ले जा रहे दो ट्रक के खिलाफ राजस्व विभाग, पुलिस विभाग एवं वन विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से जांच की गई जहां मौके से वैद्य दस्तावेज न पाए जाने के कारण कार्रवाई की गई थी जिन्हें महज दो दिनों में खनिज विभाग द्वारा कागजों की कोरम पूर्ति कर छोड़ दिया गया था जिसके चलते फिर से मार्बल व ग्रेनाइड पत्थरों का परिवहन धड़ल्ले से हो रहा है जिसके वैधानिकता पर भी लोगों द्वारा सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
सरकारी खजाने को करोड़ों रूपये का लग रहा चुना
जानकारों की माने तो मार्वल व ग्रेनाइड पत्थर काफी कीमती माने जाते हैं जिनसे बाहर की कम्पनियां काफी पैसा कमाती हैं लेकिन मझौली विकासखण्ड में संचालित कई खदाने फर्जी व जाली दस्तावेज के सहारे यहां से चोरी छुपे पत्थर निकाल कर राजस्व व खनिज विभाग को चूना लगा रहीं हैं।

