नियम ताक पर रखकर काम कराने में जुटे थे संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के अधिकारी, वन विभाग ने मौके पर रुकवाया कार्य
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के अधिकारियों की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरएस 563 रखड़ा डेम के पास बिना वैधानिक अनुमति के पेड़ कटवाकर लाइट पोल लगाने का काम कराया जा रहा था, जिसे वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर रुकवा दिया। पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्लांट प्रबंधन किसके भरोसे नियमों को नजरअंदाज कर काम शुरू करा रहा था।
जानकारी के अनुसार, प्लांट अधिकारियों के निर्देश पर संबंधित क्षेत्र में लाइट पोल लगाने का कार्य शुरू कराया गया था। आरोप है कि काम शुरू करने से पहले न तो वन विभाग से अंतिम अनुमति ली गई और न ही जरूरी दस्तावेज पूरे किए गए। इसके बावजूद पेड़ों की कटाई कराकर निर्माण कार्य चालू करा दिया गया। यदि समय रहते वन विभाग कार्रवाई नहीं करता तो और अधिक पेड़ काटे जा सकते थे।
मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग के बीट गार्ड माखनलाल द्विवेदी मौके पर पहुंचे और काम बंद कराया। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों से अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे गए, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका। इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से कार्य रुकवा दिया।

पाली रेंजर सचिन कांत ने साफ कहा कि एफसीए (Forest Conservation Act) के तहत संबंधित भूमि के लिए लैंड डायवर्जन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। विभाग को अंतिम दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नियमों के खिलाफ माना जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी तो आखिर अधिकारियों ने काम शुरू कराने की जल्दबाजी क्यों दिखाई। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को नियमों की जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर विभागीय अनुमति की अनदेखी की गई। सरकारी संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून का पालन करें, लेकिन यहां उल्टा ही देखने को मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े विभाग और संस्थान अक्सर पहले काम शुरू कर देते हैं और बाद में अनुमति लेने की कोशिश करते हैं। यदि यही काम कोई सामान्य व्यक्ति करता तो उस पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो जाती, लेकिन बड़े अधिकारियों पर अक्सर जिम्मेदारी तय नहीं होती।

फिलहाल वन विभाग ने निर्माण कार्य बंद करा दिया है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि बिना अनुमति काम शुरू कराने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है। पूरे मामले ने संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


