Patwari vs grameen:पटवारी फरीद अंसारी को बदनाम करने की साजिश? मारपीट के आरोपों पर उठे सवाल, दोनों पक्षों से आवेदन के बाद जांच जारी
Patwari vs grameen:बढ़ाउरा क्षेत्र में पदस्थ पटवारी फरीद अंसारी पर लगाए गए मारपीट के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है, लेकिन मामले में सामने आ रहे तथ्यों और अधिकारियों के बयानों से शिकायतकर्ता के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पटवारी फरीद अंसारी ने स्पष्ट शब्दों में आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उन्हें फंसाने और बदनाम करने की साजिश बताया है।
शिकायतकर्ता संजय तिवारी का आरोप है कि वह ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नायब तहसीलदार एकता शुक्ला के केबिन में गया था, जहां उसके साथ मारपीट हुई। हालांकि, पटवारी फरीद अंसारी का कहना है कि न तो उन्होंने किसी प्रकार की गाली-गलौज की और न ही मारपीट। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ जो फोटो वायरल की जा रही है, वह पुरानी तस्वीर को एआई तकनीक के माध्यम से तोड़-मरोड़ कर पेश की गई है। इसी संदर्भ में उन्होंने नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ और साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
मामले में पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल भी खुलकर पटवारी के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश है, जिसका उद्देश्य एक ईमानदार कर्मचारी की छवि धूमिल करना है। बघेल ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता पूर्व में गांव में अवैध वसूली करता रहा है और सर्वेयर के रूप में नियुक्ति के बावजूद काम नहीं कर रहा था, जिसकी शिकायत प्रशासन से की गई थी। उसी शिकायत से आहत होकर अब झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। पटवारी संघ ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
Patwari vs grameen:वहीं, नायब तहसीलदार एकता शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि उनके केबिन में किसी प्रकार की मारपीट नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों से आवेदन प्राप्त हुए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
फिलहाल, बिना ठोस साक्ष्यों के लगाए गए आरोपों और कथित एआई-निर्मित तस्वीरों ने इस पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि सच क्या है और साजिश कौन कर रहा है।
