प्रधानमंत्री की अपील बेअसर, केंद्रीय ऊर्जा सचिव का 10 गाड़ियों वाला काफिला बना चर्चा का विषय
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बिरसिंहपुर पाली में उस समय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई, जब भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे। एक ओर देश के प्रधानमंत्री लगातार मंचों से ईंधन बचाने, सादगी अपनाने और सरकारी खर्च कम करने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय ऊर्जा सचिव का भारी-भरकम काफिला लोगों की नजरों में सवाल खड़े करता दिखाई दिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सचिव के काफिले में करीब 9 से 10 वाहन शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के साथ निकले इस काफिले को देखकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब देश आर्थिक बचत, ईंधन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की बात कर रहा है, तब जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी ही अगर वीआईपी संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे तो आम जनता को क्या संदेश जाएगा।
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र पहुंचने के बाद केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं और संचालन की समीक्षा की। बताया गया कि उन्होंने उत्पादन और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर अधिकारियों से चर्चा की। हालांकि ताप विद्युत केंद्र से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को लेकर स्थानीय मीडिया लगातार सवाल उठाती रही है, जिनमें तकनीकी समस्याएं, रखरखाव, सहित अन्य स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की परेशानियां प्रमुख हैं।
निरीक्षण और बैठक के बाद सचिव मां बिरासिनी मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर माथा टेका। लेकिन यहां भी उनका काफिला आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया। मंदिर के प्रवेश द्वार के पास एक साथ कई वीआईपी वाहनों के पहुंचने से कुछ देर के लिए जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई और आवागमन प्रभावित हुआ। लोगों का कहना था कि अगर काफिले को नियंत्रित ढंग से व्यवस्थित किया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।
सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब मीडिया ने संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र से जुड़े सवालों पर केंद्रीय ऊर्जा सचिव से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की। पत्रकारों ने बिजली उत्पादन, व्यवस्थागत कमियों और स्थानीय समस्याओं को लेकर सवाल पूछने चाहे, लेकिन सचिव बिना कोई जवाब दिए वहां से निकल गए। इसे लेकर मीडिया कर्मियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी भी दिखाई दी।
लोगों का कहना है कि जब अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं तो केवल औपचारिक बैठकें और वीआईपी प्रोटोकॉल ही नजर आते हैं, लेकिन जमीनी समस्याओं पर खुलकर बात करने से बचा जाता है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री की सादगी और ईंधन बचत की अपील को वास्तव में लागू करना है तो इसकी शुरुआत शीर्ष अधिकारियों से होनी चाहिए।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वीआईपी संस्कृति और सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता अब यह पूछ रही है कि आखिर सादगी की सीख सिर्फ जनता के लिए है या फिर जिम्मेदार अफसरों पर भी समान रूप से लागू होनी चाहिए।


