शहरी-ग्रामीण जमीन विवाद पर फैलाई गई अफवाहें झूठी, प्रशासन ने तथ्यों के साथ किया खंडन
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
तहसीलदार बांधवगढ़ की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे भ्रामक आरोपों पर प्रशासन ने स्पष्ट और सख्त खंडन किया है। प्रशासन का कहना है कि शहरी भूमि को ग्रामीण बताकर करोड़ों रुपये की स्टांप ड्यूटी बचाने का आरोप पूरी तरह असत्य और षडयंत्रपूर्ण है।
प्रशासन के अनुसार, कुछ नामचीन भूमाफिया तत्वों द्वारा एक व्यक्ति विशेष, पटवारी के कथित पत्र का सहारा लेकर ईमानदार अधिकारियों को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। यह न केवल तथ्यों से परे है, बल्कि प्रशासनिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की साजिश भी प्रतीत होती है।
विवादित खसरा नंबर 727/2/2, 728/2/1, 728/3/1, 728/3/2/1, 728/4, 729/1, 729/2/1, 729/2/2/1, 733, 735, 737, 738, 739, 740 और 724 की वस्तुस्थिति को लेकर प्रशासन ने दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक किए हैं। मध्यप्रदेश शासन के गजट नोटिफिकेशन दिनांक 14 मार्च 1997 एवं 2 मई 2018 में यह भूमि स्पष्ट रूप से नगरपालिका सीमा के बाहर दर्शाई गई है।
इसके अतिरिक्त, नगरपालिका उमरिया द्वारा 26 नवंबर 2021 को जारी पत्र तथा वर्ष 2024-25 के पत्र क्रमांक 2540/नपा/लोनिवि में भी उक्त भूमि को शहरी सीमा से बाहर बताया गया है। जिला कलेक्टर एवं मध्यस्थता अधिकारी उमरिया द्वारा 12 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में भी मुआवजा निर्धारण ग्रामीण क्षेत्र मानकर किया गया है।


