फजिलगंज में एसडीएम की छापेमारी ने खोली आबकारी विभाग की कलई
जिले में खुलेआम बिक रही अवैध शराब, विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई में व्यस्त
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले में अवैध शराब का कारोबार किस कदर बेलगाम हो चुका है, इसका बड़ा खुलासा बांधवगढ़ एसडीएम अम्बिकेश प्रताप सिंह की कार्रवाई ने कर दिया। फजिलगंज की पुरानी भट्टी में हुई छापेमारी ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस इलाके में लंबे समय से खुलेआम शराब बेची जा रही थी, वहां आबकारी विभाग की टीम आखिर अब तक क्या कर रही थी, यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय के निर्देशन में एसडीएम बांधवगढ़ ने शिकायत मिलने के बाद जब फजिलगंज क्षेत्र का निरीक्षण किया तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। दो कमरों में अवैध रूप से शराब का भंडारण और विक्रय किया जा रहा था। मौके पर लोगों को बैठाकर शराब पिलाई जा रही थी। कार्रवाई के दौरान राजेश सिंह पिता वंशपति सिंह निवासी फजिलगंज को मौके से पकड़ा गया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह बस स्टैंड स्थित भट्टी से शराब लाकर यहां बेचता था।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शराब बस स्टैंड की भट्टी से लाई जा रही थी तो आबकारी विभाग को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी। क्या विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा था या फिर पूरे मामले में मिलीभगत की बू आ रही है। जिले में अक्सर आबकारी विभाग छोटी-मोटी कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाता नजर आता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गांव-गांव और कस्बों में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
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छापेमारी में भारी मात्रा में शराब और बियर जब्त की गई। इसमें व्हाइट फॉक्स वोडका, देशी प्लेन मदिरा, 8 पीएम, इम्पीरियल ब्लू, गोवा व्हिस्की, बैगपाइपर, वी-21 वोडका सहित कई ब्रांड शामिल हैं। कुल 31 हजार 560 एमएल शराब और 11 हजार 900 एमएल बियर बरामद हुई। मौके से बड़ी संख्या में खाली शराब की बोतलें भी मिलीं, जिससे साफ है कि यहां लंबे समय से अवैध कारोबार संचालित हो रहा था।
अब सवाल आबकारी विभाग की कार्यशैली पर खड़े हो रहे हैं। यदि प्रशासनिक अधिकारी शिकायत मिलते ही इतनी बड़ी कार्रवाई कर सकते हैं तो फिर आबकारी विभाग क्यों निष्क्रिय बना रहा। जिले में अवैध शराब के खिलाफ सख्ती के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन फजिलगंज की कार्रवाई ने उन दावों की पोल खोलकर रख दी है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वहीं प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण और विक्रय के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।


